जामताड़ा में दिखा दुर्लभ भौंकने वाला हिरण, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू किया; क्यों खास है यह पढ़ें
जामताड़ा के चंपापुर गांव में ग्रामीणों ने एक दुर्लभ भौंकने वाले हिरण को देखा और वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग की टीम ने हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू क ...और पढ़ें

जामताड़ा के चंपापुर में दुर्लभ भौंकने वाले हिरण का सफल रेस्क्यू।
संवाद सूत्र, नारायणपुर (जामताड़ा)। मंगलवार की दोपहर करीब 12 बजे जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत चंपापुर गांव में उस वक्त हलचल मच गई, जब ग्रामीणों ने एक दुर्लभ प्रजाति का हिरण देखा। कुत्ते की तरह आवाज़ निकालने के कारण इसे 'भौंकने वाला हिरण' या 'काकड़' कहा जाता है।
गांव में हिरण के आने की खबर आग की तरह फैल गई और कुछ ही देर में इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुट गई। भीड़ जुटने के बावजूद ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय दिया और हिरण की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा। उन्होंने किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने के बजाय तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी।
सूचना मिलते ही नारायणपुर के वनरक्षी सपन कुमार पंडित अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने सतर्कता बरतते हुए हिरण का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे नारायणपुर स्थित वन विभाग के कार्यालय ले आए।
वनरक्षी सपन कुमार पंडित ने बताया कि हिरण पूरी तरह सुरक्षित है और उसे किसी सुरक्षित प्राकृतिक वास (जंगल) में छोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इसे इसके अनुकूल माहौल में छोड़ दिया जाएगा।
कहां से आया यह दुर्लभ हिरण?
आशंका जताई जा रही है कि यह हिरण भटककर पास के टुंडी जंगल की ओर से आया होगा। वहीं दूसरी संभावना यह भी है कि इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी नारायणपुर के स्थानीय जंगलों में ही हो। विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय काकड़ इस प्रजाति की सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली नस्ल है, जो भारत और दक्षिण-पूर्वी एशिया के घने जंगलों में पाई जाती है।
क्यों खास है भौंकने वाला हिरण ?
इसे वैज्ञानिक व आम भाषा में मुंटजैक (Muntjac) या काकड़ (Barking Deer) कहा जाता है। इसके बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य।
- खतरे का अलार्म (आवाज़): जब भी इसे आसपास बाघ, तेंदुए या किसी अन्य खतरे का अहसास होता है, तो यह कुत्ते की तरह तेज़ और तीखी 'भौंकने' जैसी आवाज़ निकालता है। इसकी यह आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है, जिससे जंगल के अन्य जीव भी सतर्क हो जाते हैं।
- शारीरिक बनावट: ये आकार में छोटे होते हैं। नर काकड़ के सिर पर छोटे सींग के साथ-साथ मुंह में छोटे, नुकीले दांत भी होते हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपनी रक्षा के लिए करते हैं।
- खान-पान: यह मुख्य रूप से शाकाहारी होते हैं, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर ये छोटे-मोटे कीड़े या पक्षियों के अंडे भी खा लेते हैं।