Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Chaitra Navratri 2026: 18 या 19 मार्च, कब से शुरू होंगे चैत्र नवरात्र? काले तिल का दान करने से मां होंगी प्रसन्न

    Updated: Sat, 07 Mar 2026 04:13 PM (GMT+05:30)

    Chaitra Navratri 2026: हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि मनाया जाता है। जिसमें घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरू ...और पढ़ें

    चैत्र नवरात्र 2026। (AI Generated Image)

    चैत्र नवरात्र 2026। (AI Generated Image)

    HighLights

    1. चैत्र नवरात्र 19 मार्च से घटस्थापना के साथ होगा आरंभ।

    2. मां दुर्गा का पालकी पर आगमन, विशेष पूजा-पाठ की सलाह।

    3. काले तिल दान, हनुमान चालीसा पाठ नकारात्मकता दूर करने हेतु।

    संवाद सहयोगी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। चैत्र नवरात्र हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार है। नवरात्र 18 मार्च को है या 19 को, इसको लेकर लोगों को बीच भ्रम है।

    चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से आरंभ होने वाला यह पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना कर मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

    पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 19 मार्च की सुबह 4.52 बजे से शुरू होगा, जिसके आधार पर इसी दिन से नवरात्र का शुभारंभ होगा।

    नौ दिनों तक भक्तजन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे। इनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है।

    मान्यता है कि इन नौ दिनों में श्रद्धा, जप और तप करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

    नवरात्र के दौरान मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और व्रत-उपवास का आयोजन किया जाता है। भक्तजन मां दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन पालकी (डोली) पर माना जा रहा है। शास्त्रों में इसे पूरी तरह शुभ नहीं माना जाता और यह सामाजिक व प्राकृतिक चुनौतियों का संकेत माना जाता है।

    काले तिल का करें दान

    ऐसे समय में विशेष पूजा-पाठ व सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, नवरात्र के दौरान काले तिल और काले वस्त्र का दान, हनुमान चालीसा का पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ तथा कन्या पूजन करना विशेष फलदायी माना गया है। इससे नकारात्मक प्रभावों से बचाव और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।