कोडरमा में खनन विभाग के नए नियम से योजनाओं पर लगा ब्रेक, फंसा करोड़ों का बिल
कोडरमा में खनन विभाग के नए नियमों से सरकारी विकास योजनाओं का भुगतान रुक गया है। ई-परिवहन चालान की अनिवार्यता और वैध बालू घाटों की कमी से करोड़ों के बि ...और पढ़ें

पुरानी योजनाओं में ई-परिवहन चालान बड़ी समस्या, बालू घाट नहीं होने से नहीं मिल पाएगा चालान। जागरण
HighLights
ई-परिवहन चालान के बिना पुराने कार्यों का भुगतान असंभव।
वैध बालू घाट न होने से ई-चालान बड़ी समस्या।
संवाद सहयोगी, कोडरमा। खनन विभाग के नए नियमों के लागू होने के बाद जिले में सरकारी विकास योजनाओं के भुगतान पर संकट गहरा गया है। 24 अप्रैल से लागू नई व्यवस्था के कारण विभिन्न विभागों में करोड़ों रुपये के बिल अटक गए हैं।
जिला परिषद, भवन प्रमंडल समेत कई विभागों के संवेदकों को भुगतान नहीं मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले विकास कार्यों में प्रयुक्त लघु खनिज के लिए कार्य पूरा होने के बाद पोर्टल के माध्यम से दोगुनी रॉयल्टी राशि जमा कर बिल का भुगतान कराया जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
नई प्रणाली में केवल ई-परिवहन चालान के आधार पर ही रॉयल्टी का भुगतान संभव है। ऐसे में पुराने कार्यों के लिए ई-चालान तैयार नहीं हो पाने से भुगतान प्रक्रिया बाधित हो गई है।
उपायुक्त ने खान एवं भूतत्व विभाग की अधिसूचना का हवाला देते हुए सभी विभागों को नए नियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
विभागों से कहा गया है कि निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सभी लघु खनिजों की आपूर्ति केवल वैध ई-परिवहन चालान के माध्यम से ही की जाए।नियमों के अनुसार, सरकार की विकास योजनाओं में उपयोग होने वाले लघु खनिज केवल वैध खनन पट्टाधारी या अनुज्ञप्तिधारी से ही खरीदे जा सकेंगे।
यदि संवेदक या संबंधित विभाग ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें खनिज के स्वामिस्व के बराबर दंड राशि के साथ डीएमएफ, प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय शुल्क सहित अन्य वैधानिक शुल्क भी जमा करने होंगे।
लघु खनिजों की आपूर्ति के लिए ई-चालान आवश्यक
नई व्यवस्था में पत्थर, चिप्स, बोल्डर, डस्ट, बालू, ईंट, मिट्टी और मोरम जैसे लघु खनिजों की आपूर्ति बिना ई-परिवहन चालान के करना एमएमडीआर एक्ट, 1957 की धारा 21(2) के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। इसके साथ ही रॉयल्टी कटौती कर ब्लॉक ट्रांसफर, चेक या ड्राफ्ट के माध्यम से भुगतान की पुरानी व्यवस्था भी समाप्त कर दी गई है।
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जिले में फिलहाल वैध बालू घाट नहीं होने के कारण ई-परिवहन चालान प्राप्त करना संवेदकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इससे विकास योजनाओं की गति और भुगतान प्रक्रिया दोनों प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।