लातेहार की ओरसा घाटी में भूस्खलन से मुख्य मार्ग बंद, रास्ते में फंसे कई लोग
लातेहार की ओरसा घाटी में भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिससे ओरसापाठ जाने वाला मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गया।
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घाटी के बीच फंसे लोग। (जागरण)
HighLights
महुआडांड़ की ओरसा घाटी में भूस्खलन से मुख्य मार्ग अवरुद्ध।
भारी बारिश के कारण पहाड़ का बड़ा हिस्सा सड़क पर गिरा।
दर्जनों वाहन और लोग घाटी में फंसे, आवागमन पूरी तरह ठप।
जागरण संवाददाता, लातेहार। पहाड़ी क्षेत्र महुआडांड़ में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।
रविवार की देर शाम ओरसापाठ जाने वाले मुख्य पथ पर ओरसा घाटी के बंगला दारा के समीप अचानक पहाड़ का एक हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा।
भूस्खलन के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और बड़े-बड़े पेड़ सड़क पर गिर पड़े। देखते ही देखते मुख्य पथ मलबे से पट गया और आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। दर्जनों लोग अपने वाहनों के साथ घाटी में फंस गए।
एक पल में बंद हो गई सफर की राह
भूस्खलन अचानक हुआ, इसलिए सड़क से गुजर रहे लोगों को संभलने तक का अवसर नहीं मिला। पहाड़ से गिरे मलबे ने पूरी सड़क को अपनी चपेट में ले लिया।
देखते ही देखते वाहनों के पहिए थम गए। जो लोग कुछ देर पहले अपने गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी में थे, वे अब रास्ता खुलने की प्रतीक्षा में खड़े थे। अंधेरा गहराता गया और वर्षा भी लगातार होती रही।
घाटी में फंसे लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित बाहर निकलने की थी। पहाड़ से दोबारा मलबा गिरने की आशंका ने उनकी बेचैनी और बढ़ा दी।
वर्षा और अंधेरे के बीच मदद की आस
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। रात और लगातार हो रही वर्षा के कारण मलबा हटाने के कार्य में कठिनाई सामने आ रही है।
सड़क पर गिरे विशाल पेड़ों और पत्थरों को हटाना भी चुनौती बना हुआ है। इस बीच स्थानीय ग्रामीण भी अपने स्तर से फंसे लोगों की सहायता में जुटे हैं। घाटी में फंसे लोगों की निगाहें अब प्रशासन की ओर टिकी हैं कि कब मलबा हटे और उनकी राह खुले।
पहाड़ी क्षेत्र में पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
महुआडांड़ का बड़ा भू-भाग पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा है। वर्षा ऋतु में यहां भूस्खलन का खतरा बना रहता है। पूर्व में भी प्रखंड क्षेत्र में भूस्खलन और मार्ग अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रशासन से ऐसे स्थानों की नियमित निगरानी कराने, खतरे वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने तथा आपात स्थिति में मलबा हटाने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखने की मांग की है।
लगातार वर्षा के बीच पहाड़ की यह करवट एक बार फिर बता गई कि प्रकृति के सामने इंसानी राह कितनी नाजुक है। दिन में जिस सड़क पर वाहनों की चहल-पहल रहती है, वही सड़क रात में मलबे के ढेर के नीचे दबकर खामोश हो गई। अब लोगों को उम्मीद है कि जल्द मलबा हटेगा, रास्ता खुलेगा और घाटी में थमी जिंदगी फिर अपनी रफ्तार पकड़ सकेगी।
