लातेहार: बेतला का गेट बंद फिर भी जंगल का रोमांच जारी, सड़क किनारे दिखे हिरण-बंदर; बिहार-बंगाल से पहुंच रहे पर्यटक
बेतला राष्ट्रीय उद्यान प्रजनन काल के कारण बंद होने के बावजूद, बिहार और पश्चिम बंगाल से पर्यटक जंगल के रोमांच ...और पढ़ें

बेतला राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव प्रजनन काल के कारण बंद।
HighLights
बेतला राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव प्रजनन काल के कारण बंद।
पर्यटक पलामू किला, कमलदह झील में रोमांच तलाश रहे।
उत्कर्ष पाण्डेय, लातेहार। सामने जंगल की हरी चादर सड़क के किनारे कभी डाल से डाल छलांग लगाता बंदर तो कभी झाड़ियों के बीच से झांकता हिरण। कैमरे लिए पर्यटकों के कदम अचानक थम जाते हैं। कोई मोबाइल निकालकर इस पल को कैद करने लगता है तो कोई बच्चों को इशारा कर चुपचाप वन्यजीवों की गतिविधियां देखने लगता है।
बेतला राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य द्वार भले ही इन दिनों पर्यटकों के लिए बंद है, मगर जंगल की यही झलक उन्हें अपनी ओर खींच रही है। वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए 31 जुलाई से एक अक्टूबर तक पार्क में आम लोगों के भ्रमण पर रोक है।
इसके बावजूद बिहार और पश्चिम बंगाल से पर्यटक बेतला पहुंच रहे हैं और आसपास की प्रकृति में जंगल का रोमांच तलाश रहे हैं। पार्क के प्रवेश क्षेत्र में पहुंचते ही माहौल बदल जाता है। शहर की भागदौड़ पीछे छूट जाती है और सामने दिखाई देती है जंगल की शांत दुनिया।
पेड़ों के बीच से आती हवा, पत्तियों की सरसराहट और आसपास विचरण करते वन्यजीव पर्यटकों को कुछ देर के लिए उसी दुनिया का हिस्सा बना देते हैं। बंदरों की उछल-कूद तो मानो पर्यटकों के लिए बिना टिकट का स्वागत कार्यक्रम बन गई है। एक डाल से दूसरी डाल पर छलांग लगाते बंदर को देखकर बच्चों की आंखें चमक उठती हैं।
थोड़ी दूर हिरण दिखाई पड़ जाए तो कैमरों के लेंस उसी दिशा में घूम जाते हैं। पार्क बंद होने की जानकारी होने के बाद भी बिहार और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों की उत्सुकता कम नहीं हुई है। पार्क में प्रवेश नहीं मिल रहा तो पर्यटक पलामू किला और कमलदह झील की ओर निकल पड़ते हैं।
किसी के लिए किले की दीवारें इतिहास का पन्ना हैं तो किसी के लिए झील का शांत पानी जंगल की थकान उतारने का ठिकाना। परिवारों के साथ पहुंचे पर्यटक प्रकृति की तस्वीरें संजो रहे हैं, वहीं युवाओं का एक वर्ग जंगल और वन्यजीवों को समझने में अधिक दिलचस्पी लेता नजर आ रहा है। बेतला में केयरटेकर की भूमिका में कार्यरत दीपक कुमार समेत अन्य लोगों ने बताया कि पार्क बंद होने के बाद भी पर्यटकों का पहुंचना जारी है।
खासकर युवा वन्यजीवों के व्यवहार और संरक्षण को लेकर सवाल करते हैं। वे यह जानना चाहते हैं कि जंगल में रहने वाले जानवर किस तरह व्यवहार करते हैं, उनके संरक्षण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं और प्राकृतिक संतुलन में उनकी क्या भूमिका है।
बेतला की खूबसूरती की खास बात यही है कि यहां जंगल केवल सफारी के भीतर नहीं मिलता। पार्क के बाहर भी प्रकृति अपने पूरे रंग में दिखाई देती है। सड़क किनारे वन्यजीवों की मौजूदगी, पेड़ों की घनी छाया, झील की नीरवता और ऐतिहासिक किले की कहानी पर्यटकों को लगातार बांधे रखती है। यही वजह है कि पार्क का मुख्य द्वार बंद होने के बावजूद बेतला की राह पर पर्यटकों की आवाजाही बनी हुई है।
वन्यजीवों के लिए यह समय बेहद अहम है। प्रजनन काल में उन्हें अपेक्षाकृत शांत वातावरण मिले, इसी उद्देश्य से पार्क को पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है। पर्यटकों के लिए यह बंदी जंगल से दूरी का संदेश नहीं, वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी का सबक भी है।
आज पार्क की सीमा के बाहर खड़े होकर पर्यटक जिस हिरण को निर्भय होकर विचरण करते देखते हैं या जिस बंदर की उछल-कूद पर मुस्कुरा उठते हैं, वही दृश्य बताता है कि जंगल का असली सौंदर्य उसके स्वाभाविक और निर्बाध जीवन में है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।