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    अब देवघर ही नहीं... झारखंड में यहां भी निकलेगी अनोखी कांवड़ यात्रा, लोध फॉल से शुरू होगा सफर

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 10:30 AM (GMT+05:30)

    झारखंड के लातेहार में लोध फॉल से सरनाधाम तक 20 किमी की नई कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। यह पहल धार्मिक पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और जनआस्था को जोड़कर एक ...और पढ़ें

    लोध फॉल से सरनाधाम तक 20 किमी की कांवड़ यात्रा।

    लोध फॉल से सरनाधाम तक 20 किमी की कांवड़ यात्रा।

    HighLights

    1. लोध फॉल से सरनाधाम तक 20 किमी की कांवड़ यात्रा।

    2. धार्मिक पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और जनआस्था का संगम।

    उत्कर्ष पाण्डेय, लातेहार। सावन आते ही देशभर में कांवड़ यात्राओं की रौनक बढ़ जाती है। कहीं गंगा का जल शिवालयों तक पहुंचता है तो कहीं नदियों के घाट आस्था के रंग में रंग जाते हैं। झारखंड के लातेहार जिले का महुआडांड़ अनुमंडल भी इस सावन एक नई धार्मिक परंपरा का साक्षी बनने जा रहा है।

    पलामू टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित लोध फॉल से पवित्र जल लेकर शिवभक्त 20 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए गारू प्रखंड की मायापुर पंचायत स्थित सरनाधाम के नर्मदेश्वर शिव मंदिर में जलाभिषेक करेंगे। यह आयोजन कांवड़ यात्रा के साथ प्रकृति, आस्था और ग्रामीण संस्कृति के दुर्लभ संगम के रूप में अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है।

    झरनों की फुहारों के बीच गूंजेगा बोल बम:

    झारखंड का गौरव माने जाने वाले लोध फॉल की पहचान अब तक प्राकृतिक पर्यटन स्थल के रूप में रही है। सावन में वर्षा के बाद जब इसकी विशाल जलधारा पूरी ताकत से चट्टानों पर गिरती है तो चारों ओर धुंध, जलकण और हरियाली मिलकर अलौकिक दृश्य रच देते हैं।

    इन्हीं जलधाराओं से कांवड़ में जल भरकर हजारों श्रद्धालु जब हर-हर महादेव और बोल बम का उद्घोष करते हुए आगे बढ़ेंगे, तब जंगलों की निस्तब्धता भी शिवमय हो उठेगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह यात्रा झारखंड की विशिष्ट धार्मिक पहचान बन सकती है।

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    प्रकृति की गोद से गुजरेगी पूरी पदयात्रा :

    इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राकृतिक मार्ग है। पूरी पदयात्रा पहाड़ी रास्तों, वनांचल, छोटी नदियों, ग्रामीण बस्तियों और हरियाली से भरे इलाकों से होकर गुजरेगी। श्रद्धालु केवल जल लेकर नहीं चलेंगे, वे प्रकृति के बीच आध्यात्मिक अनुभूति का भी अनुभव करेंगे।

    यही कारण है कि आयोजन समिति इस यात्रा को धार्मिक आयोजन के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ने का अभियान भी मान रही है।

    सेवा शिविरों से सजेगा शिवपथ:

    मानस मणि दीप सेवा संस्थान ने यात्रा को सुव्यवस्थित और भव्य बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। पूरे मार्ग में सेवा शिविर, पेयजल, प्राथमिक उपचार, विश्राम स्थल और स्वयंसेवकों की व्यवस्था रहेगी।

    भजन मंडलियां, ढोल-नगाड़े, शंखध्वनि और शिवभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यात्रा को उत्सव का स्वरूप देंगी। श्रद्धालुओं से प्लास्टिक मुक्त यात्रा और स्वच्छता बनाए रखने की भी अपील की जाएगी, ताकि जंगल और जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रहे।

    11 सदस्यीय समिति संभालेगी जिम्मेदारी:

    आयोजन को सफल बनाने के लिए 11 सदस्यीय कार्यकारी समिति का गठन किया गया है। अध्यक्ष जानकी सिंह, सचिव कमलेश यादव और कोषाध्यक्ष श्रीमणि यादव के नेतृत्व में समिति गांव-गांव जाकर लोगों को यात्रा से जोड़ रही है।

    स्वयंसेवक श्रद्धालुओं का पंजीकरण, मार्ग व्यवस्था, सेवा शिविर और सुरक्षा संबंधी तैयारियों में जुटे हैं। लक्ष्य है कि यह यात्रा पूरे क्षेत्र का सामूहिक जनआयोजन बने।

    धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम :

    इस पहल से धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है। सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से स्थानीय दुकानदारों, वाहन संचालकों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की संभावना है।

    महुआडांड़, गारू और लोध फॉल का क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभर सकता है। पर्यटन विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्राकृतिक स्थलों को धार्मिक आयोजनों से जोड़ने पर स्थानीय विकास की नई संभावनाएं खुलती हैं।

    स्थायी परंपरा बनाने का संकल्प :

    संस्थान के अध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि उद्देश्य केवल जलाभिषेक कराना नहीं, बल्कि ऐसी परंपरा स्थापित करना है जो प्रकृति के सम्मान, सामाजिक सहभागिता और आध्यात्मिक चेतना को एक साथ आगे बढ़ाए। उनका कहना है कि यदि यह यात्रा हर वर्ष इसी स्वरूप में आयोजित होती रही तो आने वाले समय में लोध फॉल से सरनाधाम तक का यह मार्ग झारखंड की पहचान बन जाएगा।

    झारखंड की नई पहचान बनने की ओर कदम :

    सावन अमावस्या की सुबह जब हजारों कांवड़ियों के कदम एक साथ बढ़ेंगे, लोध फॉल की जलधारा कांवड़ों में सजेगी, जंगलों की पगडंडियां भगवा रंग में रंगेंगी और पहाड़ों से टकराकर हर-हर महादेव का उद्घोष गूंजेगा, तब यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन का नहीं होगा।

    यह लातेहार की प्राकृतिक संपदा, जनआस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन की नई संभावनाओं का ऐसा संगम होगा, जो पूरे झारखंड के लिए एक नई पहचान गढ़ने की क्षमता रखता है।