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वर्दी पहनाकर भेजा था, तिरंगे में लौटा बेटा; लोहरदगा के सेना जवान का ड्यूटी के दौरान पंजाब में निधन

Updated: Mon, 24 Aug 2026 09:45 AM (IST)

लोहरदगा के सेन्हा निवासी सेना के जवान दिलीप उरांव का पंजाब के भटिंडा में ड्यूटी के दौरान आकस्मिक निधन हो ...और पढ़ें

जवान दिलीप उरांव का पंजाब में ड्यूटी के दौरान निधन।

जवान दिलीप उरांव का पंजाब में ड्यूटी के दौरान निधन।

HighLights

  1. जवान दिलीप उरांव का पंजाब में ड्यूटी के दौरान निधन।

  2. सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई।

संवाद सूत्र, सेन्हा (लोहरदगा)। लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के भड़गांव सरना टोली निवासी राम सुंदर उरांव के 36 वर्षीय पुत्र दिलीप उरांव का पंजाब के भटिंडा में ड्यूटी के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। विगत गुरुवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। रविवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में मातम छा गया।

अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग उमड़ पड़े। दिलीप उरांव वर्ष 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वे 68 बटालियन ईएनजी में कार्यरत थे। उनके पिता राम सुंदर उरांव ने बताया कि गुरुवार रात करीब 12:30 बजे सेना की ओर से उन्हें पुत्र की तबीयत बिगड़ने और निधन की सूचना मिली।

शनिवार शाम पार्थिव शरीर को रांची एयरपोर्ट लाया गया, जहां से नामकुम स्थित सेना कैंप में रखा गया। रविवार दोपहर पार्थिव शरीर को भड़गांव सरना टोली लाया गया। सेना के वाहन से पार्थिव शरीर गांव लाया गया। बीएस कालेज के पास से ग्रामीण मोटरसाइकिलों पर आगे-आगे चलकर जवान को अंतिम विदाई देने पहुंचे।

कल्हेपाट से भड़गांव सरना टोली तक सड़क के दोनों ओर ग्रामीण नम आंखों से खड़े रहे। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गांव पहुंचने पर सेना के जवानों ने दिवंगत जवान को सैन्य सम्मान के साथ सलामी दी। जिला परिषद सदस्य राधा तिर्की, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखैर भगत, मुखिया अनिल उरांव और राजश्री उरांव सहित अन्य लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

अंतिम संस्कार कोयल नदी स्थित नंदगांव में किया गया। जहां बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार पाहन बंधनू उरांव और पुजार बस्तु भगत ने अंतिम संस्कार की विधि पूरी कराई।

dilip oraon

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दिलीप उरांव के निधन से पत्नी सविता उरांव, 14 वर्षीय पुत्री नैंसी उरांव, सात वर्षीय पुत्री कृति उरांव और पांच वर्षीय पुत्र विवान उरांव का रो-रोकर बुरा हाल था। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर के पास से स्वजन और बच्चे हटने को तैयार नहीं थे।

माता सोमारी उरांव और पिता राम सुंदर उरांव बेटे को याद कर बार-बार रो पड़ रहे थे। पिता ने भावुक होकर कहा कि बेटे को वर्दी पहनाकर देश सेवा के लिए भेजा था, लेकिन वह तिरंगे में वापस लौटा।