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लोहरदगा में छात्राओं के लिए बने 39 शौचालय बेकार, कई स्कूलों में लड़कों का टॉयलेट करना पड़ता है उपयोग

Published: Tue, 28 Jul 2026 08:26 PM (GMT+05:30)

लोहरदगा के सरकारी स्कूलों में 1616 शौचालयों में से 66 अनुपयोगी हैं, जिनमें 39 लड़कियों के लिए बने शौचालय शामिल हैं, जिससे छात्राओं को परेशानी हो रही है।

कैरो प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मवि गितिलगढ़ में बालिका शौचालय की स्थिति। फोटो जागरण

कैरो प्रखंड के राजकीय उत्क्रमित मवि गितिलगढ़ में बालिका शौचालय की स्थिति। फोटो जागरण

HighLights

  1. लोहरदगा में 66 सरकारी स्कूल शौचालय अनुपयोगी पाए गए।

  2. 39 लड़कियों के शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं।

  3. छात्राओं को स्वच्छता और गरिमा संबंधी समस्याओं का सामना।

विक्रम चौहान, लोहरदगा। सरकारी स्कूलों में स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने को लेकर करोड़ो रुपये खर्च हो रहे हैं। कहीं 15वीं वित्त आयोग की राशि से तो, कहीं पर दूसरे मद से इसमें पैसे खर्च किए गए हैं। इसके बावजूद तस्वीर और आंकड़े लोहरदगा जिला की चिंताजनक है।

जिले के 503 सरकारी विद्यालयों में बने कुल 1616 शौचालयों में से 66 शौचालय अनुपयोगी हैं। इनमें सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि बालिकाओं के लिए बनाए गए 934 शौचालयों में से 39 उपयोग के लायक नहीं हैं, जबकि बालकों के 22 शौचालय भी जर्जर और खराब स्थिति में हैं।

ऐसे में विद्यालयों में स्वच्छता और छात्राओं की गरिमा को लेकर दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई विद्यालयों में शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती। कहीं पानी की सुविधा नहीं है तो, कहीं दरवाजे टूटे हुए हैं।

कई जगह सीटें क्षतिग्रस्त हैं और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को इन्हीं शौचालयों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है।

छात्राओं को करना पड़ता है परेशानी का सामना

कई स्कूलों में तो हालत ऐसी है कि छात्रों के दो शौचालय में से एक शौचालय को मजबूरी में छात्राओं के लिए सुरक्षित करना पड़ा है। यह स्थिति सही नहीं है, लेकिन स्कूल मजूबरी में ऐसा कर रहे हैं।

विद्यालयों में अलग और स्वच्छ शौचालय विशेष रूप से किशोरावस्था की छात्राओं के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। स्वच्छ शौचालय नहीं होने से छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई दोनों प्रभावित होती हैं। कई बार मासिक धर्म के दौरान छात्राओं को विद्यालय आने में भी कठिनाई होती है।

गरिमापूर्ण शिक्षा का अधिकार

देश में स्कूलों में स्वच्छता को लेकर समय-समय पर न्यायपालिका भी गंभीर टिप्पणी कर चुकी है। विभिन्न मामलों में बच्चों के गरिमापूर्ण शिक्षा के अधिकार के तहत विद्यालयों में कार्यशील और अलग शौचालय उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

वहीं केंद्र-राज्य सरकार और शिक्षा विभाग भी समय-समय पर विद्यालयों में शौचालयों के रखरखाव, पेयजल और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करते रहे हैं, लेकिन लोहरदगा की तस्वीर इन दावों से मेल नहीं खाती।

जहां पर शौचालय नहीं हैं या उपयोग के लायक नहीं हैं, वहां के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। डीएएमएफटी और दूसरे मद से भी शौचालय का निर्माण कराया गया है। विद्यालय विकास मद में पहले इस प्रकार की आवश्यकता को स्कूल स्तर पर ही पूरा कर लिया जाता था। -अभिजीत कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, लोहरदगा

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