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    मेमू पैसेंजर की लेटलतीफी से लोहरदगा-रांची के यात्रियों को परेशानी, छूट रही महत्वपूर्ण ट्रेनें

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 04:55 PM (GMT+05:30)

    लोहरदगा-रांची मेमू पैसेंजर ट्रेन लगातार देरी से चल रही है, जिससे यात्रियों, खासकर मजदूरों को कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने से भारी परेशानी हो रही है। तकनीकी ...और पढ़ें

    हर दिन कई घंटे देर से चल रही है लोहरदगा-रांची मेमू पैसेंजर।

    हर दिन कई घंटे देर से चल रही है लोहरदगा-रांची मेमू पैसेंजर।

    HighLights

    1. लोहरदगा-रांची मेमू पैसेंजर ट्रेन लगातार देरी से चल रही है।

    2. यात्रियों की महत्वपूर्ण कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने से परेशानी।

    3. तकनीकी खराबी, ट्रैक मेंटेनेंस, मालगाड़ी को प्राथमिकता मुख्य कारण।

    विक्रम चौहान, लोहरदगा। लोहरदगा-रांची रेलखंड पर चलने वाली मेमू पैसेंजर ट्रेन हाल के दिनों लगातार देरी से संचालित हो रही है। इसके कारण यात्रियों, विशेषकर मजदूर वर्ग और नियमित रेल यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    ट्रेन की देरी के चलते रांची से खुलने वाली झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस और धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण कनेक्टिंग ट्रेनें छूट रही हैं, जिससे यात्रियों को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ रही है। लोहरदगा के लोगों के लिए रांची आने-जाने का सबसे सुलभ और प्रमुख साधन मेमू पैसेंजर है।

    रांची से लोहरदगा के लिए तीन फेरे और टोरी-लोहरदगा-रांची के बीच एक फेरा संचालित होता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से चारों फेरों में ट्रेन के विलंब से चलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

    यात्रियों का कहना है कि तकनीकी कारणों, ट्रैक पर मेंटेनेंस कार्य और मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने के कारण यात्री ट्रेनों को कई स्थानों पर रोका जाता है, जिससे निर्धारित समय से काफी देर हो जाती है।

    कब-कब देर से चली ट्रेन

    विगत चार अगस्त को टोरी-रांची मेमू लगभग 35 मिनट विलंब से चली, जबकि पांच अगस्त को यह ट्रेन एक घंटा 12 मिनट देर से रांची पहुंची। वहीं छह अगस्त को भी टोरी से खुलने के बाद ट्रेन लगभग 15 मिनट विलंब से रांची पहुंची।

    इसी प्रकार से सुबह से लेकर देर रात तक की मेमू का परिचालन अक्सर देर से हो रहा है। टोरी से चलकर लोहरदगा होते हुए मेमू पैसेंजर के रांची पहुंचने का निर्धारित समय दोपहर 2:35 बजे है।

    जबकि झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस दोपहर 2:50 बजे और धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस अपराह्न 3:35 बजे रांची से रवाना होती है। ऐसे में मेमू के थोड़ी भी देर होने पर यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूट जाती हैं।

    मेमू पैसेंजर अक्सर देर से पहुंचती है, जिससे उनकी आवश्यक ट्रेनें छूट जाती हैं। कुछ ही मिनटों के अंतर पर दूसरी ट्रेन होने के कारण देरी से समय और धन दोनों का नुकसान होता है।
    -धर्मपाल उरांव, रेल यात्री

    दोपहर वाली मेमू अक्सर विलंब से चलती है और इसका सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग पर पड़ता है, जो धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं। पहले मेमू से रांची पहुंचकर आसानी से कनेक्टिंग ट्रेन मिल जाती थी, लेकिन अब यह अनिश्चित हो गया है कि समय पर पहुंच पाएंगे या नहीं।
    -आशीष उरांव, रेल यात्री

    रेलखंड पर ट्रैक मेंटेनेंस का कार्य चल रहा है, जिसके कारण कुछ दिनों में ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है। हर दिन ऐसी स्थिति नहीं रहती। कई बार यात्रियों के चढ़ने-उतरने में अधिक समय लगने और परिचालन संबंधी अन्य कारणों से भी ट्रेनें विलंबित हो जाती हैं। रेलवे का प्रयास है कि ट्रेनों का संचालन जल्द से जल्द निर्धारित समय के अनुसार हो।
    -नवनीत भगत, लोहरदगा, रेलवे स्टेशन प्रबंधक

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