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    लोहरदगा: 14 साल से बंद उगरा पीएचसी बना खंडहर, करोड़ों की लागत बेकार; इलाज को भटक रहे ग्रामीण।

    Updated: Fri, 15 May 2026 01:38 PM (IST)

    लोहरदगा के सेन्हा प्रखंड के उगरा गांव में 14 साल पहले बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी चालू नहीं हो सका है, जिससे करोड़ों की लागत से बनी इमारत खंडह ...और पढ़ें

    एआई जेनरेटेड तस्वीर

    एआई जेनरेटेड तस्वीर

    HighLights

    1. उगरा पीएचसी 14 साल से बंद, बना खंडहर।

    2. करोड़ों की लागत बेकार, ग्रामीण इलाज को परेशान।

    3. डॉक्टरों की कमी, सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन।

    गफ्फार अंसारी, सेन्हा (लोहरदगा)। लोहरदगा जिले के सेन्हा प्रखंड के उगरा गांव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले 14 वर्षों से शुरू होने का इंतजार कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की आस लगाए ग्रामीणों को हर बार केवल आश्वासन ही मिला, लेकिन अस्पताल आज तक चालू नहीं हो सका। 

    हालत यह है कि करोड़ों की लागत से बने स्वास्थ्य केंद्र भवन, स्वास्थ्यकर्मी आवास और अन्य संरचनाएं उपयोग के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही हैं। 

    अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो सकी

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि अस्पताल शुरू होने से उन्हें इलाज के लिए सेन्हा सीएचसी और सदर अस्पताल लोहरदगा का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लेकिन निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी अस्पताल में नियमित स्वास्थ्य सेवा शुरू नहीं हो सकी। 

    बेहतर मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लाखों रुपये खर्च हुए हैं, बावजूद इसके अस्पताल परिसर की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। सामान चोरी हो रहे हैं। भवन की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं, खिड़कियां और दरवाजे टूट चुके हैं, जबकि परिसर में जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं। 

    आवास भी लंबे समय से खाली पड़े

    स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बनाए गए आवास भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उगरा के लिए एक महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति भी की गई है, लेकिन वर्तमान में डाक्टर और मेडिकल स्टाफ सेन्हा सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत हैं। 

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    डॉक्टर तो 48 घंटे की ड्यूटी सेन्हा सीएचसी में दे रही है। इसके अलावे आवश्यकता अनुसार आयुष्मान आरोग्य मंदिर उगरा में भी डा. श्रेया सेवा देती हैं। ऐसे में उगरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यहां पर स्थिति चिंताजनक है।

    प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अस्पताल शुरू कराने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आपात स्थिति में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है।- ताजुद्दीन अंसारी, ग्रामीण, उगरा, लोहरदगा


    यहां पर अस्पताल शुरू होता तो उनके साथ ऐसी घटना नहीं होती। अस्पताल आज तक शुरू नहीं हो पाया है। यहां अस्पताल शुरू नहीं होने से क्षेत्र के मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी दूर जाना पड़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।- फरीदा खातून, ग्रामीण महिला, उगरा


    सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने की बात करती है, लेकिन उगरा का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसकी वास्तविक स्थिति को उजागर कर रहा है। यह तो भला हो आयुष्मान आरोग्य मंदिर उगरा की यहां पर सीएचओ, एएनएम के होने से लोगों को इलाज मिल जाता है। पीएचसी के शुरू होने से लोगों को काफी लाभ मिलता।- अनिता उरांव, ग्रामीण महिला, उगरा

    आयुष्मान आरोग्य मंदिर उगरा में समय-समय पर डॉक्टर आती हैं, जिससे ग्रामीणों का इलाज होता है। यहां दवाएं भी उपलब्ध हैं। अभी यहीं से ग्रामीणों का इलाज किया जा रहा है। विशेष कैंप में डॉक्टर आते हैं। पुराना अस्पताल भवन जर्जर है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर उगरा का लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है।- शीतल झरना एक्का, एएनएम, उगरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर


    यदि अस्पताल चालू हो जाए और सुविधाओं में विकास हो तो आसपास के कई गांवों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को जल्द आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर अस्पताल में डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करनी चाहिए। जिससे लोगों को इसका लाभ मिले।- अफसाना खातून, पंचायत समिति सदस्य, उगरा पंचायत।

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उगरा को जल्द ही शुरू कराया जाएगा। चिकित्सकों की कमी के कारण परेशानी होती है। चिकित्साकर्मी और चिकित्सक की प्रतिनियुक्त कर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।- डॉ. राजू कच्छप, सिविल सर्जन, लोहरदगा