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झारखंड में पश्चिम बंगाल से सप्लाई हो रहा नकली गुड़, अवैध शराब बनाने में हो रहा इस्तेमाल

Published: Sun, 06 Sep 2026 03:52 PM (IST)

झारखंड के पाकुड़ में पश्चिम बंगाल से आ रहे नकली गुड़ से अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है, जिससे ...और पढ़ें

बंगाल से नकली गुड़ की सप्लाई। फोटो जागरण

बंगाल से नकली गुड़ की सप्लाई। फोटो जागरण

HighLights

  1. पश्चिम बंगाल से नकली गुड़ की अवैध सप्लाई।

  2. रसायन युक्त गुड़ से बन रही जहरीली शराब।

  3. ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा, बीमारियां बढ़ रहीं।

गणेश पांडेय, पाकुड़। झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित महेशपुर प्रखंड के सीमावर्ती गांव तुलसीपुर, बलरामपुर, असकंधा, धोबना सहित बंगाल सीमा से सटे अन्य गांवों में इनदिनों एक खतरनाक खेल चल रहा है और अवैध धंधा का गढ़ बन चुका है।

इन इलाकों में रसायन युक्त नकली (डुप्लीकेट) गुड़ से अवैध शराब बनाने का कारोबार बड़े पैमाने पर पैर पसार चुका है। सीमा पार (पश्चिम बंगाल) के नकली गुड़ तस्कर स्थानीय दलालों की मिलीभगत से यह नेटवर्क बेखौफ चला रहा है।

इस मामले में आबकारी (उत्पाद) विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग मौन है। पश्चिम बंगाल से सप्लाई हो रही नकली गुड़ से झारखंड में बसे उक्त गांवों के ग्रामीणों का सेहत खराब हो रहा है।

साथ ही अवैध तरीके से शराब बनाने का भी खेल चल रहा है। पश्चिम बंगाल के माफिया, स्थानीय दलालों व प्रशासन के लोगों के जरिए सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में मिलावटी व केमिकल युक्त गुड़ की सप्लाई करते हैं।

इस गुड़ को कम समय और कम लागत में तेज नशा देने वाली शराब में बदलने के लिए इसमें यूरिया, नौसादर और अन्य जहरीले रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण माफियाओं के डर से कुछ खेलकर नहीं बोल रहे हैं।

स्थानीय कुछ लोगों ने नाम उजागर नहीं करने के शर्त पर बताया कि बंगाल से सटे गांवों में प्रतिदिन दो से तीन पिकअप वैन में नकली गुड़ लाया जाता है, जिसका इस्तेमाल शराब बनाने में किया जाता है।

स्वास्थ्य पर गंभीर संकट, धीरे-धीरे जहर निगल रहे लोग

नकली गुड़ और रसायनों के मिश्रण से तैयार इस महुआ/देशी शराब का सीधा और घातक असर आम लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।

तुलसीपुर, असकंधा और आसपास के गांवों में कई लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा दुकानों में बिकने वाली उक्त नकली गुड़ के सेवन से मानव जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञ का कहना है कि इस प्रकार की मिलावटी शराब या नकली गुड़ के नियमित सेवन से लिवर सिरोसिस, किडनियों का फेल होना, पेट में गंभीर अल्सर और आंखों की रोशनी जाने तक का खतरा रहता है। नकली गुड़ के सेवन का असर सबसे अधिक बच्चे व बुजुर्गों पर पड़ता है।

बंगाल के रास्ते लाया जा रहा है गुड़

नकली गुड़ पश्चिम बंगाल के मुरारई, राजग्राम के रास्ते महेशपुर प्रखंड क्षेत्र में लाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के ढोढ़िया गांव में भी जमकर कारोबार हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार पश्चिम बंगाल के नलहटी, रामपुरहाट आदि स्थानों में रासायनिक युक्त गुड़ बनाया जाता है।

बहुत बड़े पैमाने पर कारोबार चल रहा है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्ती और कार्रवाई के दावों के बावजूद यह कारोबार दिन-दूना रात-चौगुना फलफूल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध और जानलेवा कारोबार पर नकेल नहीं कसी गई, तो सीमावर्ती महेशपुर का यह इलाका किसी बड़े जहरीली शराब कांड का शिकार हो सकता है।

कैसे होती है नकली गुड़ की पहचान

विशेषज्ञ के अनुसार नकली या रासायनिक गुड़ अधिक चमकदार, हल्का पीला या सुनहरा दिखाई देगा। चमकदार बनाने के लिए इसमें सोडियम हाइड्रोसल्फाइड या अन्य रासायनिक पदार्थ मिलाए जाते हैं। नकली गुड़ की पहचान आसानी से की जा सकती है। असली गुड़ का स्वाद प्राकृतिक रुप से मीठा होता है।

नकली गुड़ हल्का नमकीन या कड़वा स्वाद मिल सकता है। नकली गुड़ पानी में ठीक से नहीं घुलेगा तथा बर्तन के नीचे सफेद या गंदा अवशेष बैठ जाएगा। नकली गुड़ में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ बेहद खतरनाक होता है।

अभी नए आए हैं। प्रशिक्षण का इंतजार हो रहा है। हालांकि शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। -अभिमन्यु कुमार, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, पाकुड़

यह मामला संज्ञान में नहीं आया था। इस तरह के मामले में त्वरित कार्रवाई होगी। -प्रेमरंजन कुमार, एसआइ, उत्पाद