Pakur News: राखी का धागा खींच लाया 150 किमी दूर, 80 साल की गौरी देवी ने फिर ताजा की भाई-बहन के रिश्ते की यादें
Pakur News: 80 वर्षीय गौरी देवी ने 150 किलोमीटर का सफर तय कर पाकुड़ में अपने भाई को राखी बांधी। ...और पढ़ें

राखी बांधन के बाद अपने भाई की आरती उतारतीं गौरी देवी।
HighLights
80 वर्षीय गौरी देवी ने 150 किमी का सफर तय किया।
पाकुड़ में भाई को राखी बांधने पहुंचीं, रिश्ता मजबूत किया।
उम्र और दूरी के बावजूद भाई-बहन का अटूट प्रेम।
भारतेंदु त्रिवेदी, पाकुड़। राखी के धागे में बचपन की यादें, रिश्तों की गर्माहट और जीवनभर साथ निभाने का विश्वास बंधा होता है। इसी रिश्ते की डोर को मजबूत बनाए रखने के लिए 80 वर्षीय गौरी देवी ने उम्र की परवाह किए बिना करीब 150 किलोमीटर का सफर तय किया। रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए वह पाकुड़ पहुंचीं तो भाई-बहन के रिश्ते की पुरानी यादें फिर ताजा हो गईं।
गौरी देवी पाकुड़ शहर के तांतीपाड़ा स्थित अपने भाई के घर गुरुवार की रात बिहार के भागलपुर के पीरपैंती से पहुंचीं। लंबी दूरी की यात्रा के बाद भी उनके चेहरे पर थकान से अधिक भाई से मिलने की खुशी दिखाई दे रही थी।
शुक्रवार की सुबह उन्होंने परंपरागत तरीके से राखी की थाली सजाई। भाई के माथे पर तिलक लगाया और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद मिठाई खिलाकर लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की।
उम्र बढ़ी, लेकिन रिश्ते की डोर नहीं हुई कमजोर
गौरी देवी के लिए रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को निभाने की परंपरा है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने राखी बांधने की रस्म उसी उत्साह से निभाई, जैसे बचपन के दिनों में निभाती थीं। करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय कर भाई के घर पहुंचना इस रिश्ते के प्रति उनके स्नेह और समर्पण को दर्शाता है।
भाई की कलाई पर राखी बांधने के दौरान परिवार के सदस्यों के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी। इस भावुक पल ने यह संदेश दिया कि समय और दूरी चाहे कितनी भी बढ़ जाए, भाई-बहन के रिश्ते की मिठास कभी कम नहीं होती।
