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पलामू में एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगते ही मुंह से निकला झाग, निजी क्लीनिक में इलाज के दौरान 4 साल के बच्चे की मौत

Published: Sun, 08 Nov 2026 02:07 PM (IST)

पलामू के मनातू में एक निजी क्लीनिक में कथित झोलाछाप डॉक्टर द्वारा इंजेक्शन लगाने के बाद चार साल के बच्चे की मौत हो गई।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. चार साल के बच्चे की इंजेक्शन से मौत।

  2. मनातू के निजी क्लीनिक में लगा था इंजेक्शन।

  3. झोलाछाप डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा।

संवाद सूत्र, तरहसी (पलामू)। सर्दी-खांसी से परेशान चार साल के इकलौते बेटे का इलाज कराने निजी क्लीनिक पहुंचे माता-पिता की खुशियां कुछ ही देर में मातम में बदल गईं।

परिजनों का आरोप है कि मनातू स्थित एक निजी क्लीनिक में कथित झोलाछाप चिकित्सक ने बच्चे को हायर एंटीबायोटिक इंजेक्शन दिया।

इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। वह बेचैन होकर छटपटाने लगा और उसके मुंह से झाग निकलने लगा। घबराए स्वजन आनन-फानन में उसे लेकर मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

इकलौते बेटे की मौत से माता-पिता पर टूटा दुखों का पहाड़

यंश की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता समेत अन्य स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्चे की किलकारियों से घर गुलजार रहता था, उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।

बताया जाता है कि मिथिलेश यादव झारखंड मुक्ति मोर्चा के पंचायत सचिव हैं। यंश परिवार का इकलौता बेटा था। करीब एक माह पहले ही उसके दादा का निधन हुआ था। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि इकलौते बेटे की मौत ने उसे गहरे दुख में डुबो दिया।

क्लीनिक की वैधता और इलाज की प्रक्रिया पर उठे सवाल

घटना के बाद मनातू में संचालित निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई ऐसे क्लीनिक संचालित हैं, जिनके पंजीकरण और वहां इलाज करने वाले चिकित्सकों की योग्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और योग्य चिकित्सकों से इलाज सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व उपायुक्त के निर्देश पर जिले के विभिन्न प्रखंडों में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम और क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुछ संस्थानों को सील किया गया था।

इसके बावजूद मनातू में इस तरह की घटना सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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