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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 21, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jharkhand Politics : झारखंड में इस पूर्व सांसद ने छोड़ दिया RJD का साथ, बसपा में हुए शामिल; यहां से टिकट कन्फर्म

    Updated: Sun, 21 Apr 2024 08:04 AM (IST)

    झारखंड में लालू यादव की पार्टी राजद को झटका लगा है। पहले चरण के चुनाव के बाद झारखंड में एक राजद नेता ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। अब वह बसपा में शामि ...और पढ़ें

    राजद छोड़ बसपा में गए कामेश्वर बैठा
    राजद छोड़ बसपा में गए कामेश्वर बैठा

    HighLights

    1. पलामू में 2009 में राजद प्रत्याशी घूरन राम को पराजित कर सांसद बने थे बैठा
    2. झामुमो के टिकट पर लड़ा था चुनाव, बाद में राजद में हो गए थे शामिल

    जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। Jharkhand Political News पलामू के पूर्व सांसद कामेश्वर बैठा ने टिकट नहीं मिलने पर राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। अब वह बसपा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।

    वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कामेश्वर बैठा ने झामुमो के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने राजद प्रत्याशी घूरन राम को 23,338 मतों से हराया था। उस चुनाव में कामेश्वर बैठा को 1,67,995 मत मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी घूरन राम को 1,44,457 मत मिले।

    इस बार राजद ने नहीं दिया टिकट

    उसके बाद साल 2014 में हुए चुनाव में कामेश्वर बैठा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालांकि उस चुनाव में महज 37,043 मत लाकर चौथे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2019 का चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा। उसके बाद वह राजद में शामिल हो गए थे, लेकिन इस बार उनको राजद ने टिकट नहीं दिया।

    इसके पहले उन्होंने वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से उप चुनाव लड़ा था। इसमें वह 22,327 मतों से राजद प्रत्याशी घूरन राम से हार गए थे। उस चुनाव में राजद प्रत्याशी घूरन राम को 1,64,202 मत मिले थे। वहीं, 1,41,875 मत प्राप्तकर कामेश्वर बैठा दूसरे स्थान पर रहे थे।

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    जेल से ही कामेश्वर बैठा ने दाखिल किया था नामांकन

    पूर्व माओवादी नेता कामेश्वर बैठा ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से नामांकन किया था। इसके बाद जेल से ही चुनाव जीत गए। सांसद बनने के साढ़े तीन साल बाद वे जेल से बाहर निकले थे।

    उनके चुनाव में विजयी होने पर कई माओवादी विचारधारा के लोगों ने सक्रिय राजनीति में आकर वर्ष 2009 व 2014 के विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई। इसमें सतीश कुमार, युगल पाल, दिनकर यादव, विनोद शर्मा आदि शामिल थे। हालांकि इस में कोई सफलता नहीं हुए।

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