सात फेरों के सात महीने बाद बुझ गई जिंदगी, पलामू में दहेज की आग में झुलसी नवविवाहिता; ससुर गिरफ्तार
पलामू के तरहसी में दहेज की आग में झुलसी नवविवाहिता नेहा कुमारी की शादी के सात महीने बाद मौत हो गई। ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, जबकि पति की भू ...और पढ़ें

ससुर महेंद्र राम को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
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नवविवाहिता नेहा कुमारी की दहेज के कारण मौत।
ससुर महेंद्र राम को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
संवाद सूत्र, तरहसी (पलामू)। सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले रिश्ते को महज सात महीने में दहेज के आरोपों ने ऐसी त्रासदी में बदल दिया कि एक नवविवाहिता की जिंदगी ही खत्म हो गई। तरहसी थाना क्षेत्र का यह मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विवाहिता की इलाज के दौरान मौत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी ससुर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि पति की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। मृतका की पहचान चतरा जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चैनपुर निवासी बबलू राम की 20 वर्षीय पुत्री नेहा कुमारी के रूप में हुई है।
परिजनों के अनुसार, नेहा की शादी 25 नवंबर 2025 को तरहसी थाना क्षेत्र के कसमार गांव निवासी पवन कुमार के साथ हिंदू रीति-रिवाज से पदमा सूर्य मंदिर में हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ समय बाद दहेज की अतिरिक्त मांग को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।
मृतका के पिता ने तरहसी थाना में दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि पति पवन कुमार और ससुर महेंद्र राम ने मिलकर नेहा पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। आग से गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसे पहले मेदिनीनगर में भर्ती कराया गया। वहां से बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर किया गया, जहां देव अस्पताल, देवकमल अस्पताल और अंततः रिम्स में उसका इलाज चला।
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कई दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद 25 जून को चिकित्सकों ने उसकी हालत बेहद नाजुक बताते हुए घर ले जाने की सलाह दी। परिजनों के अनुसार, घर लौटने के दौरान 26 जून को उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मायके पक्ष ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए तरहसी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी महेंद्र राम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। प्रभारी थाना प्रभारी मनिंदर शर्मा ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पति पवन कुमार की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि कानून सख्त होने के बावजूद दहेज जैसी कुप्रथा क्यों नहीं रुक रही है। बेटियों को सम्मान और सुरक्षा देने की बात करने वाला समाज आज भी दहेज की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है।
एक नई जिंदगी की शुरुआत करने वाली बेटी यदि कुछ ही महीनों में हिंसा और प्रताड़ना का शिकार हो जाए, तो यह केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की असफलता है।
दहेज प्रथा के खिलाफ कानून मौजूद हैं, लेकिन केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जब तक समाज स्वयं इस कुरीति के खिलाफ खड़ा नहीं होगा और बेटियों को बोझ नहीं बल्कि सम्मान का प्रतीक नहीं मानेगा, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल होगा। नेहा की मौत एक परिवार का दुख भर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है कि रिश्तों की नींव लालच नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता पर ही टिक सकती है।