1985 के पोल-तारों पर टिकी पलामू के पंडवा की बिजली, हल्की हवा में घंटों ब्लैकआउट, किसानों ने आंदोलन की दी चेतावनी
पंडवा प्रखंड में 40 साल पुराने बिजली के खंभों और तारों के कारण हल्की बारिश में भी बिजली गुल हो जाती है, जिससे ग्रामीण और किसान परेशान हैं। भाजपा किसान ...और पढ़ें

हल्की बारिश या हवा में भी बिजली आपूर्ति बाधित। एआई जेनरेटेड
HighLights
पंडवा में 40 साल पुराने बिजली के खंभे और तार।
हल्की बारिश या हवा में भी बिजली आपूर्ति बाधित।
संवाददाता जागरण, पंडवा (पलामू)। डिजिटल इंडिया और 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावों के बीच पंडवा प्रखंड आज भी वर्ष 1985 में लगाए गए जर्जर पोल और तारों के सहारे चल रहा है। हल्की बारिश या तेज हवा चलते ही पंडवा और मुरमा फीडर से जुड़े दर्जनों गांवों की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जेबीवीएनएल राजस्व वसूली पर तो ध्यान दे रहा है, लेकिन चार दशक पुराने बिजली ढांचे को बदलने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है।
स्थिति यह है कि बुधवार दोपहर करीब तीन बजे से पंडवा प्रखंड के आधा दर्जन गांव मे बिजली गुल था , जो लगभग 24 घंटे बाद गुरूवार को शाम मे बहाल हुआ। जो शुक्रवार को 11.30 बजे दिन में फिर से बाधित हो गया। ग्रामीणों ने जर्जर पोल-तार बदलकर निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुरमा फीडर अलग, लेकिन सुविधा अब भी अधूरी
करीब एक वर्ष पहले मुरमा फीडर को तकनीकी रूप से अलग तो किया गया, लेकिन नए उपकरण, मशीनें, पोल और तार नहीं लगाए गए। इसके कारण फीडर में बार-बार फाल्ट हो रहा है। सांसद प्रतिनिधि उपेंद्र नाथ सिंह ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग केवल कागजी उपलब्धियां गिना रहा है, धरातल पर उपभोक्ता परेशान हैं।
वहीं, भाजपा किसान मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष धर्मेंद्र पाठक ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही है। यदि शीघ्र जर्जर पोल-तार नहीं बदले गए तो तुकबेरा 33/11 केवी सब-स्टेशन में तालाबंदी कर आंदोलन किया जाएगा।
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हादसे का खतरा बढ़ा
ग्रामीणों के अनुसार, दर्जनों जर्जर पोल तारों के सहारे टिके हैं और 11 हजार वोल्ट के तार खतरनाक तरीके से झूल रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। कई स्थानों पर इंसुलेटर क्षतिग्रस्त होने से तार आपस में टकराकर टूट जाते हैं।
गौरतलब है कि अप्रैल 2012 में तुकबेरा स्थित 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र का उद्घाटन तत्कालीन विधायक चंद्रशेखर दुबे ने किया था। उस समय सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन वर्षों बाद भी पुराने पोल-तार न बदले जाने से उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल सका।
पंडवा में 40 साल पुराने पोल-तारों से आपूर्ति हो रही है। हल्की हवा में भी फाल्ट होता है और घंटों बिजली गुल रहती है।
-वीरेंद्र कुमार सिंह, पूर्व उप प्रमुख, पंडवा
बिजली विभाग राजस्व वसूली पर अधिक ध्यान देता है, लेकिन जर्जर व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं दिखती।
- संजय चंद्रवंशी, ग्रामीण उपभोक्ता सह किसान, झरी, पंडवा
खेती के मौसम में रोजाना फॉल्ट होने से सिंचाई प्रभावित हो रही है। विभाग को जल्द स्थायी समाधान करना चाहिए।'
-अशोक प्रसाद, ग्रामीण, मुरमा पंडवा