विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

25 जुलाई से 20 नवंबर तक शादियों और शुभ कार्यों पर रोक, देवउठनी एकादशी से फिर लौटेगी शहनाइयों की गूंज

Published: Sat, 18 Jul 2026 07:00 AM (IST)

25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू होगा, जिससे 20 नवंबर 2026 तक सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

शादियों और शुभ कार्यों पर रोक

शादियों और शुभ कार्यों पर रोक

HighLights

  1. 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी पर मांगलिक कार्यों पर रोक।

  2. भगवान विष्णु 20 नवंबर 2026 तक क्षीरसागर में शयन करेंगे।

  3. नवंबर में देवउठनी एकादशी के बाद शुभ कार्य फिर शुरू।

राकेश पांडेय, भुरकुंडा(रामगढ़)। बैंड, बाजा, बरात और शुभ कार्यों पर चार महीने के लिए ब्रेक लगने वाला है। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से मांगलिक कार्यों पर लंबी अवधि के लिए विराम लग जाएगा। विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश समेत सभी प्रकार के मांगलिक कार्य के लिए नवंबर महीने तक इंतजार करना पड़ेगा। 

भगवान श्रीविष्णु 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 तक क्षीरसागर में शयन करेंगे। हिंदू धर्मग्रंथों और पंचांग के अनुसार 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ हो रहा है। 

चार महीने के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन ब्रह्मांड के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंपकर चार महीने के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में चले जाएंगे। 

ज्योतिषचार्य वीर विक्रम नारायण पांडेय ने बताया कि जब भगवान विष्णु निद्रा में होते हैं, तो उस अवधि में किए गए मांगलिक कार्यों का शुभ फल प्राप्त नहीं होता। इसीलिए इस दौरान किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत नहीं की जाती। भगवान के शयन काल में शादियों के लिए पंचांग में कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। 

नए घर में रहने जाना या नए भवन का उद्घाटन करना वर्जित रहेगा। बच्चों के मुंडन और उपनयन संस्कार नहीं किए जा सकेंगे। नए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत और नए मकान की नींव रखना भी इस अवधि में शुभ नहीं माना जाता। देवशयनी एकादशी से पहले मुहूर्त अनुसार मांगलिक कार्य किये जा सकते हैं।

नवंबर में लौटेगी रौनक

मांगलिक कार्यों पर लगा यह विराम 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन समाप्त होगा। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की निद्रा से जागेंगे और शहनाइयों की गूंज और शुभ कार्यों की बहार लौटेगी। पंचांग के अनुसार नवंबर में 21, 22, 23, 24, 28 व 29 तारीख को विवाह का मुहूर्त है।

चलता रहेगा व्रत, अनुष्ठान

पंडित उमेश कुमार पांडेय ने बताया कि चातुर्मास में किए गए जप, होम, स्वाध्याय और व्रत का अनंत फल मिलता है। इस अवधि में प्रतिदिन स्नान के बाद भगवान विष्णु के सम्मुख पुरुषसूक्त का जप करने से बुद्धि तीव्र होती है। वेदों का स्वाध्याय करने वाला विद्वान बनता है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।