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रामगढ़ के शकरकंद की बांग्लादेश और आम की यूएई तक पहुंच, किसानों को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार

Published: Sat, 07 Nov 2026 08:19 AM (GMT+05:30)

झारखंड के रामगढ़ जिले में पिछले 26 सालों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आया है, जहां किसान अब पारंपरिक ...और पढ़ें

पारंपरिक धान से आधुनिक, विविध खेती की ओर बदलाव।

पारंपरिक धान से आधुनिक, विविध खेती की ओर बदलाव।

HighLights

  1. पारंपरिक धान से आधुनिक, विविध खेती की ओर बदलाव।

  2. शकरकंद और आम का बांग्लादेश, यूएई तक निर्यात।

संवाद सहयोगी, रामगढ़। साल 2000 में जब झारखंड अलग हुआ, रामगढ़ का किसान सिर्फ एक फसल जानता था - धान। मानसून आया तो फसल, नहीं आया तो पलायन। यहां की 58 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर थी, पर सिंचाई सिर्फ 14.5 प्रतिशत खेतों में थी। 75 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत थे। बीज देशी, खाद कम, मंडी कोसों दूर। गोला, चितरपुर, दुलमी में किसान बैल और कुदाल से खेती करते थे।

जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्र 1,37,602 हेक्टेयर है, इसमें शुद्ध खेती योग्य जमीन सिर्फ 20,667 हेक्टेयर है। क्रापिंग इंटेंसिटी 119 प्रतिशत है, यानी साल में एक से ज्यादा फसल लेने वाले किसान बढ़े हैं। गोला और चितरपुर में यह 260 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि मांडू-पतरातू में 85 प्रतिशत ही है।

जिले के लिए धान आज भी सबसे बड़ी फसल है, पर अब मक्का, अरहर, आलू, गोभी, फूलगोभी, शकरकंद, सरसों, गेहूं और सब्जी का रकबा बढ़ा है। यहां के उपज विशेषकर शकरकंद व आम आदि विदेशों तक अपनी पहचान बना चुके हैं। गोला प्रखंड क्षेत्र में उत्पादित शकरकंद अब स्थानीय बाजार व दूसरे राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश तक पहुंच रहा है। इसी तरह फलों में आम यूएई सहित कई देशों तक अपनी अलग पहचान बना चुका है।

गोला क्षेत्र के किसान बताते हैं कि शकरकंद की खेती ने किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। इस वर्ष बाजार में लाभ मांग बढ़ी तो व्यापारी किसानों की फसल को खेत से ही खरीद ले रहे हैं। भारत के अन्य राज्यों सहित दूसरे देशों तक यहां के उपज की पहुंच ने कृषि उपज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

स्थानीय किसानों ने बताया कि गोला ब्लाक सब्जी का हब बन गया है। पतरातू के बिचा, लेम, सुतारपुर में एसआरआइ-एसडब्लूआइ विधि से धान-गेहूं का उत्पादन तीन गुणा बढ़ा है। सिंचाई के लिए पहले कुआं-तालाब पर निर्भरता थी। अब 13,223 बोरवेल, 468 तालाब, 72 चेक डैम और लिफ्ट इरिगेशन से सिंचाई हो रही है। 2020 से सोलर पंप क्रांति आइ। टीआरआइएफ के कुशल किसान अभियान में रामगढ़ में सोलर पंप मिलने के बाद किसान साल में चार फसल लेने लगे, आमदनी लाखों में पहुंची।

झारखंड आर्थिक सर्वे 2025-26 में मछली उत्पादन और फूड प्रोसेसिंग सबसे तेज बढ़ने वाला सेक्टर है। रामगढ़ में पतरातू डैम, तालाबों में केज कल्चर, बत्तख- बकरी पालन, बैकयार्ड पोल्ट्री बढ़ी है। केभीके के डक और गोट यूनिट, मशरूम और लाह की ट्रेनिंग से महिलाओं को रोजगार मिला। 2026 में केभीके ने 2,370 किसानों को मृदा स्वास्थ्य की ट्रेनिंग दी, इसमें 1,457 महिलाएं थीं।

किसान क्रेडिट कार्ड, एफपीओ और भीईजीएफईडी से किसान सीधे मंडी पहुंच रहे हैं। पहले उपज बेचने के लिए रांची-हजारीबाग 40-60 किमी जाना पड़ता था, अब रामगढ़ मंडी, गोला हाट और एफपीओ के पिकअप वैन से 10-15 किमी में बिक जाती है। फिर भी एमएसपी और कोल्ड स्टोरेज की कमी से सब्जी किसान को उचित दाम नहीं मिलता। जिले में अपना बड़ा कोल्ड स्टोरेज नहीं है। 

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