करोड़ों का बजट... कागजी दावे खास, लेकिन रामगढ़ में पार्ट-टाइम टीचरों के भरोसे चल रहा कस्तूरबा विद्यालय
रामगढ़ जिले में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिक्षिकाओं की भारी कमी से जूझ रहे हैं, जहाँ 2446 छात्राओं की सुरक्षा और पढ़ाई मात्र 6 पूर्णकालिक शिक्षि ...और पढ़ें

सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, रामगढ़।
HighLights
रामगढ़ में 6 कस्तूरबा विद्यालयों में मात्र 6 पूर्णकालिक शिक्षिकाएं।
2446 छात्राओं की सुरक्षा और पढ़ाई पर गंभीर संकट।
शिक्षिकाओं की कमी से वार्डन बदलने की व्यवस्था ठप।
दिलीप कुमार सिंह, रामगढ़। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी शैक्षिक योजनाओं में शुमार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGVB) रामगढ़ जिले में खुद अपने वजूद के लिए जूझ रहा है।
पिछड़े क्षेत्रों में महिला साक्षरता दर बढ़ाने और लैंगिक अंतराल को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना आज शिक्षिकाओं के घोर अभाव के कारण संकट में है।
हालात यह हैं कि जिले के 6 आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली 2446 छात्राओं की सुरक्षा और पठन-पाठन का पूरा दारोमदार मात्र 6 पूर्णकालिक (स्थायी) शिक्षिकाओं के कंधों पर टिक गया है।
सुरक्षा और जवाबदेही पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
नियमों के मुताबिक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में प्रत्येक स्कूल के लिए 5 पूर्णकालिक शिक्षिकाओं के पद स्वीकृत हैं। पूर्णकालिक शिक्षिकाओं पर न केवल पढ़ाने की जिम्मेदारी होती है, बल्कि वे रात में भी आवासीय परिसर में रहकर छात्राओं की सुरक्षा की जवाबदेही संभालती हैं।
वर्तमान में जिले के चारों कस्तूरबा विद्यालयों और दो झारखंड आवासीय बालिका विद्यालयों (JAVB) में सिर्फ एक-एक पूर्णकालिक शिक्षिका तैनात है।
बाकी का काम पार्ट-टाइम शिक्षिकाओं के भरोसे चल रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अंशकालिक शिक्षिकाओं के लिए स्कूल में रुकने की आवासीय व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में यदि एकमात्र पूर्णकालिक शिक्षिका किसी निजी कारण से छुट्टी पर चली जाए, तो छात्राओं की सुरक्षा पूरी तरह रामभरोसे हो जाती है।
वार्डन बदलने की व्यवस्था भी ठप
इस घोर कमी का सीधा असर विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज पर भी पड़ रहा है। नियमानुसार, किसी अंशकालिक शिक्षिका को स्कूल का वार्डन नहीं बनाया जा सकता।
यही कारण है कि पुराना कार्यकाल (टर्म) पूरा होने के बावजूद विभाग वार्डन का फेरबदल नहीं कर पा रहा है और व्यवस्था को जबरन खींचा जा रहा है।
रामगढ़ जिले की जमीनी हकीकत: एक नजर में
जिले में संचालित कस्तूरबा (KGVB) और झारखंड आवासीय बालिका विद्यालयों (JAVB) की स्थिति इस प्रकार है:
क्र. सं. प्रखंड का नाम नामांकित छात्राएं वर्तमान पूर्णकालिक शिक्षिकाएं स्वीकृत पद
1. मांडू (KGVB) 450 01 05
2. पतरातू (KGVB) 501 01 05
3. रामगढ़ (KGVB) 500 01 05
4. गोला (KGVB) 460 01 05
5. दुलमी (JAVB) 315 01 05
6. चितरपुर 220 01 05
कुल 06 विद्यालय 2,446 06 30
1. मांडू (KGVB) 450 01 05
2. पतरातू (KGVB) 501 01 05
3. रामगढ़ (KGVB) 500 01 05
4. गोला (KGVB) 460 01 05
5. दुलमी (JAVB) 315 01 05
6. चितरपुर 220 01 05
कुल 06 विद्यालय 2,446 06 30
भारी-भरकम बजट के बाद भी बेटियां परेशान
इन आवासीय विद्यालयों के लिए सरकार की ओर से हर साल करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया जाता है। सुविधाओं के नाम पर कागजों में इसे आम से खास बताया जाता है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और बीपीएल परिवारों की बेटियों को 12वीं तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा किया जाता है।
लेकिन धरातल पर विषयवार स्थायी शिक्षिकाएं न मिलने से छात्राओं की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। पठन-पाठन से लेकर मॉनिटरिंग तक की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।