'10 साल लंबी वेटिंग लिस्ट!' रामगढ़ के दुर्गा मंदिर में 'डाक' चढ़ाने की अनोखी परंपरा, 2037 तक होती है एडवांस बुकिंग
मांडूबस्ती के दुर्गा मंदिर में 'डाक चढ़ाने' की अनोखी परंपरा है, जिसके लिए भक्तों को 2037 तक इंतजार करना पड़ता ...और पढ़ें

मांडू बस्ती दुर्गा मंदिर। जागरण
HighLights
मांडूबस्ती दुर्गा मंदिर में 'डाक चढ़ाने' की अनोखी परंपरा।
भक्तों को 2037 तक करना पड़ता है अपनी बारी का इंतजार।
संजय मंडल, मांडू (रामगढ़)। मांडूबस्ती स्थित शौंडिक समाज द्वारा स्थापित दुर्गा मंदिर में भक्ति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है। यहां माता रानी को डाक चढ़ाने की परंपरा इतनी लोकप्रिय है कि भक्तों को नंबर आने में दस साल से भी अधिक इंतजार करना पड़ता है।
भक्त विजयादशमी के दिन मंदिर परिसर में पूजा समिति के पास अपना नाम दर्ज कराते हैं और मन्नत पूरी होने पर डाक चढ़ाने का अवसर प्राप्त करते हैं।
1953 से जारी परंपरा
मंदिर स्थापना के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। बताया जाता है कि 1953 से भक्तों द्वारा नाम दर्ज करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी। वर्तमान में डाक चढ़ाने का क्रम 2037 तक तय हो चुका है।
वर्ष 2026 में मित्तल मंडल, 2027 में परमेश्वर साव, 2028 में संजय मंडल, 2029 में दयानंद प्रसाद, 2030 में ध्रुव प्रसाद, 2031 में दिनेश्वर प्रसाद, 2032 में विजय प्रसाद, 2033 में विक्रांत प्रसाद, 2034 में आदित्य प्रसाद व भागीरथ प्रसाद, 2035 में प्रदीप प्रसाद, 2036 में राजदीप प्रसाद और 2037 में दीपक कुमार माता को डाक चढ़ाएंगे।
प्रतिमा निर्माण और प्रसाद वितरण
केवल डाक चढ़ाने ही नहीं बल्कि प्रतिमा निर्माण, प्रसाद चढ़ावा और वितरण के लिए भी भक्त अपना नाम दर्ज कराते हैं। वर्ष 2026 में प्रतिमा निर्माण मित्तल मंडल, 2027 और 2028 में रामसहाय साव, 2029 में संगीता कुमारी तथा 2030 में छोटेलाल साहू प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी निभाएंगे।
वहीं वर्ष 2026 से 2028 तक प्रतिपदा से दशमी तक प्रसाद वितरण रणधीर कुमार और घी का चढ़ावा भी अलग-अलग परिवारों द्वारा वर्षों तक बुक किए जा चुके हैं।
अखंडदीप के लिए लगती है बोली
मंदिर परिसर में दुर्गा पूजा के दौरान अखंडदीप जलाने की भी विशेष परंपरा है। कलश स्थापना से लेकर विजयादशमी तक अखंडदीप लगातार जलता रहता है। इसके लिए हर वर्ष विजयादशमी के दिन आचार्य बिरेंद्र पांडेय की देखरेख में बोली लगाई जाती है।
सबसे अधिक बोली लगाने वाले भक्त के घर पर बाजे-गाजे के साथ अखंडदीप पहुंचाया जाता है। 2037 तक अखंडदीप के लिए घी सुशील कुमार के द्वारा दिया जाएगा।
मांडूबस्ती दुर्गा मंदिर की यह अनोखी व्यवस्था न केवल आस्था की गहराई को दर्शाती है बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परंपरा को भी मजबूत करती है। यही कारण है कि इस मंदिर में पूजा करने का अवसर भक्तों के लिए सौभाग्य और गर्व की बात मानी जाती है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।