पिता का साया उठा, झेली आर्थिक तंगी: संघर्ष की मिसाल बनकर सीए परीक्षा के झारखंड टॉपर बने रुद्र राज
सीए इंटरमीडिएट परीक्षा के नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें रांची के रुद्र राज डौन ने पहला स्थान हासिल किया। ...और पढ़ें

सीए इंटरमीडिएट रांची टॉपर रुद्र राज डौन (नीली शर्ट) ने आर्थिक बाधाएं पार कर हासिल किया मुकाम।
HighLights
रुद्र राज डौन बने सीए इंटरमीडिएट रांची के टॉपर।
टेलर की बेटी तंजील कौशर ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद छात्रों ने पाई बड़ी सफलता।
जागरण संवाददाता, रांची। सीए इंटरमीडिएट परीक्षा का रिजल्ट गुरुवार को जारी हो गया। रांची सेंटर से पांच विद्यार्थी सबसे आगे रहे हैं। इसमें पहला स्थान प्राप्त किया है रूद्र राज डौन, दूसरे स्थान पर तंजील कौशर, तीसरे स्थान पर सिद्धार्थ जैन, चौथे स्थान पर दक्ष खोवाल और पांचवें स्थान पर आर्यन कुमार मिश्रा रहे।
टॉपर का कहना है कि लगातार पढ़ने से ही सफलता पायी जा सकती है। इसमें रूद्र ने आर्थिक परेशानियों को पार करके ये मुकाम हासिल किया, वहीं दूसरे स्थान की तंजील कौशर के पिता टेलर का काम करते हैं।
झारखंड के गौरव
- रूद्र राज डौन (प्रथम स्थान): 600 में से 423 अंक प्राप्त किए। पिता के निधन और आर्थिक तंगी के बावजूद मां के सहयोग से यह मुकाम हासिल किया।
- तंजील कौशर (द्वितीय स्थान): 600 में से 364 अंक प्राप्त किए। एक टेलर की बेटी ने विपरीत परिस्थितियों और किताबों की कमी के बावजूद पहले ही प्रयास में यह सफलता पाई।
- सिद्धार्थ जैन (तृतीय स्थान): बिना किसी ऑफलाइन कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन क्लास की मदद से 352 अंक हासिल किए।
आर्थिक परेशानी को पीछे छोड़ रूद्र राज बने टॉपर
रांची के मेन रोड़ के रहने वाले रूद्र राज डौन 600 में 423 अंक लाकर रांची सेंटर के पहले टॉपर बने हैं। इनके पिता का देहांत आठ साल पहले हो गया था। इनकी माता वरनाली डौन ने इनके पढ़ाई का खर्च उठाया और इन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। इस दौरान आर्थिक परेशानी भी आयी, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
मारवाड़ी कालेज से बीकॉम की पढ़ाई कर रहे रूद्र ने बताया कि अगर आप लगातार पढ़ाई करते हैं और इसके साथ अपना फोकस कोर्स पर रखते हैं तो आपको सफलता जरूर हासिल होती है। अब ये सीए फाइनल की तैयारी में जुट गए हैं।
डोरंडा के टेलर की बेटी तंजीम बनी है दूसरी टॉपर
डोरंडा के मणिटोला में रहने वाली तंजीम कौशर के पिता जमील अहमद टेलर का काम करते हैं। घर में आर्थिक परेशानी भी थी और इसके बाद भी तंजीम ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। डोरंडा कालेज से बीकॉम की पढ़ाई कर चुकी तंजीम का कहना है कि पहले ही प्रयास में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है।
उन्होंने 600 में 364 अंक हासिल किया है। वहीं 12वीं में काॅमर्स की पढ़ाई करने के दौरान ही सीए बनने का सपना देखा था। इसके लिए नौ से 10 घंटे की पढ़ाई की और अपने विषय पर फोकस रखा।
तंजीम बताती है कि घर में परेशानियां थी और किताबें खरीदने में परेशानी होती थी, लेकिन पिता हमेशा पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। इस वजह से मैं ये मुकाम हासिल कर सकी हूं।
मेन रोड के रहनेवाले सिद्धार्थ ने बिना कोचिंग पाई सफलता
रांची के मेन रोड के रहने वाले सिद्धार्थ जैन का कहना है कि मैंने सीए इंटरमीडिएट की तैयारी खुद से की है और जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन क्लास का सहारा लिया। इन्होंने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए सात से आठ घंटे की पढ़ाई की।
इनका कहना है कि पढ़ाई के लिए आपको लगातार जुटना पड़ता है। सबसे पहले कान्सेप्ट समझे और इसके बाद पढ़ाई शुरू करें। ये संत जेवियर्स कालेज से बीकाम की पढ़ाई कर रहे हैं। सिद्धार्थ ने 600 में 352 अंक हासिल किया है।
रांची सेंटर के इन विद्यार्थियों ने साबित कर दिया कि यदि हौसला बुलंद हो और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो किसी भी आर्थिक या संसाधन संबंधी चुनौती को पार किया जा सकता है।
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