CBSE का बड़ा फैसला: अब सिर्फ अंकों से नहीं, 'होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड' से होगा छात्रों का मूल्यांकन; नर्सरी से 8वीं तक नई व्यवस्था लागू
सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में अब छात्रों का मूल्यांकन पारंपरिक अंकों के बजाय होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (एचपीसी) के जरिए होगा। यह नई प्रणाली बच्चों के ...और पढ़ें

सीबीएसई स्कूलों में होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड लागू, छात्रों का होगा समग्र विकास मूल्यांकन। (फोटो: फाइल)
HighLights
एचपीसी से छात्रों का समग्र विकास मूल्यांकन होगा।
रांची के स्कूलों में नर्सरी से आठवीं तक लागू।
अंकों के दबाव से मुक्ति, आत्मविश्वास बढ़ेगा।
अनुज तिवारी, रांची। शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में अब छात्रों का मूल्यांकन पारंपरिक अंक आधारित प्रणाली से हटकर होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (एचपीसी) के जरिए किया जाएगा। यह नई व्यवस्था बच्चों के केवल शैक्षणिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास का भी समग्र आकलन करेगी।
राजधानी रांची के अधिकतर सीबीएसई स्कूलों में इसकी शुरुआत हो चुकी है और फिलहाल इसे नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक के छात्रों पर लागू किया जा रहा है। अगले चरण में नौवीं से 12वीं कक्षा से इसे शुरू किया जाना है।
रांची के कई प्रमुख सीबीएसई स्कूलों ने इस प्रणाली को अपनाना शुरू कर दिया है। स्कूल प्रबंधन का मानना है कि यह कदम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना है।
क्या है होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड
होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड एक व्यापक मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें बच्चे की पढ़ाई के साथ-साथ उसके व्यवहार, सोच, सहयोग क्षमता, नेतृत्व गुण, रचनात्मकता और मानसिक स्वास्थ्य जैसे पहलुओं को भी शामिल किया जाता है।
यह रिपोर्ट कार्ड केवल शिक्षक द्वारा नहीं, बल्कि छात्र स्वयं, उसके सहपाठी (मित्र) और अभिभावकों के फीडबैक के आधार पर तैयार किया जाएगा। यह बदलाव शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाएगा।
इससे बच्चों में रटने की प्रवृत्ति कम होगी और वे समझ के साथ सीखने की ओर बढ़ेंगे। नई मूल्यांकन प्रणाली में अब शिक्षा का लक्ष्य केवल अच्छे अंक नहीं, बल्कि एक संतुलित और सक्षम व्यक्तित्व का निर्माण करना है।
कैसे होगा मूल्यांकन
- इस नई प्रणाली में मूल्यांकन के कई स्तर होंगे।
- पहला शिक्षक द्वारा शैक्षणिक और व्यवहारिक आकलन किया जाएगा।
- दूसरा, छात्र स्वयं अपना आत्म मूल्यांकन करेगा, जिससे उसे अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का अवसर मिलेगा।
- तीसरा, छात्र अपने दो सहपाठियों का भी मूल्यांकन करेंगे, जिससे टीमवर्क और आपसी समझ विकसित होगी।
- चौथा, अभिभावकों का फीडबैक भी शामिल किया जाएगा, जिससे घर और स्कूल दोनों के दृष्टिकोण को जोड़ा जा सके।
कार्ड में क्या-क्या होगा शामिल
होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड में कई आयामों को शामिल किया गया है। इसमें विषयवार प्रदर्शन, भाषाई कौशल (पढ़ना, लिखना, बोलना) के साथ-साथ कई बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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इसमें गणितीय समझ और तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और कला में रुचि, खेलकूद और शारीरिक सक्रियता, सामाजिक व्यवहार, जैसे सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व, भावनात्मक स्थिति, जैसे आत्मविश्वास, तनाव प्रबंधन और संवेदनशीलता, डिजिटल और प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग में भागीदारी शामिल है।
बच्चों को 360 डिग्री के स्तर से मूल्यांकन करने का प्रयास किया जाएगा ताकि उसकी कमजोरियों को पकड़कर उसके क्षमता के आधार पर शिक्षा दी जा सके। इसके अलावा, प्रत्येक बच्चे के लिए सुझाव और एरिया आफ इंप्रूवमेंट भी दर्ज किया जाएगा, ताकि आगे उसकी जरूरत के अनुसार विशेष शैक्षणिक सहायता दी जा सके।
सत्र के अंत में होगा समग्र निर्णय
यह रिपोर्ट सत्र में दो बार होगा, हर छह माह पर रिपोर्ट तैयार किया जाएगा। जिससे पता चलेगा कि बच्चे को किस क्षेत्र में अधिक मार्गदर्शन की आवश्यकता है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उसकी रुचि किस क्षेत्र में अधिक है जैसे खेल, कला, विज्ञान या अन्य गतिविधियां ताकि उसी दिशा में उसे आगे बढ़ाया जा सके और उसके कौशल को निखारा जा सके।
क्या होगा छात्रों को लाभ
इस नई व्यवस्था से छात्रों को कई तरह के लाभ मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब बच्चों पर केवल अंक लाने का दबाव कम होगा और वे अपनी रुचियों के अनुसार आगे बढ़ सकेंगे।
दूसरा, आत्म मूल्यांकन और सहपाठी मूल्यांकन से बच्चों में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी। तीसरा, शिक्षक और अभिभावकों के संयुक्त फीडबैक से बच्चे की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन संभव होगा।
चौथा, कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते हो सकेगी और उन्हें विशेष सहायता दी जा सकेगी। पांचवां, यह प्रणाली बच्चों को केवल पढ़ाई में अच्छा नहीं बल्कि जीवन के लिए तैयार करने में मदद करेगी।
एचपीसी के माध्यम से बच्चों में एकेडमिक के अलावा क्या ग्रोथ है उसे देखा जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा अभिभावकों को मिलेगा जिन्हें यह पता चल सकेगा कि उनका बच्चा पढ़ाई के अलाव किन क्षेत्र में बेहतर कर सकता है। साथ ही क्लास टीचर अन्य विषयों के शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित कर रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिससे उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।
- राजेश पिल्लई, प्राचार्य, कैराली स्कूल