यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 25, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jharkhand : तेजस्वी के न्योते पर बिहार चले इरफान अंसारी, पार्टी से कहा- अब झारखंड में नहीं करूंंगा चुनाव प्रचार
Irfan Ansari कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी इन दिनों पार्टी से नाराज हैं। वह अब झारखंड में चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा है कि उन्हें बिहार ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, रांची। अपने बयानों और कृत्यों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी पार्टी से नाराज हैं। नाराजगी का कारण है कि इरफान के पिता फुरकान अंसारी को कांग्रेस ने गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से टिकट नहीं दिया है।
पार्टी नहीं छोड़ने का दिया आश्वासन
फुरकान अंसारी 2004 में गोड्डा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। हालांकि, नाराजगी के बावजूद जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी ने कांग्रेस के राज्य प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम को आश्वस्त किया है कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे। पार्टी नेताओं से इरफान ने दो टूक कहा कि इस चुनाव में बिहार से तेजस्वी यादव का न्यौता आया है। वे झारखंड में नहीं, बिहार में चुनाव प्रचार करेंगे।
इरफान को मनाने पहुंचे वरिष्ठ नेता
जामताड़ा के विधायक अंसारी को मनाने के लिए बुधवार को रांची स्थित उनके आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेता पहुंचे। सामान्य लोकाचार के बाद इरफान ने अपनी परेशानी प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मीर से बताई। मांग रखी कि प्रदेश में अकलियत समाज का 20 प्रतिशत वोट है।
इस समाज से उम्मीदवार होना भी जरूरी है। इस पर आलमगीर आलम ने उन्हें शांत करने की कोशिश की। इरफान ने पलटकर पूछा कि आखिर आपने अल्पसंख्यकों के हक के लिए क्या किया? विधायक ने कहा कि जहां हक होता है, वहां आग्रह करने का कोई मतलब नहीं है।
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सीएम ने की प्रमुख नेताओं संग बैठक
मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर एवं ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने झामुमो के प्रतिनिधि विनोद पांडेय के साथ लोकसभा चुनाव को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर एवं झामुमो नेता विनोद पांडेय ने बताया कि आइएनडीआइए गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत सभी 14 लोकसभा सीटों पर सुनिश्चित करने को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
तय हुआ कि गठबंधन के सभी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पंचायत स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर ज्यादा से ज्यादा मतदान अपने पक्ष में कराने की रणनीति पर काम हो।
सभी दल के विधायक और मंत्रीगण को भी जिम्मेदारी दी जाएगी कि वह ज्यादा से ज्यादा हर लोकसभा क्षेत्र में सभा करें और जनता को गठबंधन के पक्ष में मतदान करने के लिए जागरूक करें।
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