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    2 सेकेंड दूर थी मौत, छत गिरने से बाल-बाल बचे डालटनगंज के रेल जवान; 18 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 05:53 PM (IST)

    डालटनगंज रेल थाना में 40 साल पुराने जर्जर बैरक की छत गिरने से पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के 18 घंटे बाद भी रेलवे का कोई ...और पढ़ें

    डालटनगंज में जर्जर बैरक की छत गिरी, बाल-बाल बचे रेल पुलिस के जवान।

    डालटनगंज में जर्जर बैरक की छत गिरी, बाल-बाल बचे रेल पुलिस के जवान।

    HighLights

    1. डालटनगंज रेल थाना में जर्जर बैरक की छत गिरी।

    2. पुलिसकर्मी बाल-बाल बचे, बड़ा हादसा टला।

    3. रेलवे अधिकारियों की अनदेखी से जवानों में रोष।

    संवाद सूत्र, पलामू/रांची। धनबाद रेल मंडल अंतर्गत डालटनगंज रेलवे स्टेशन स्थित रेल थाने में तैनात पुलिसकर्मियों की जान मंगलवार रात उस समय बाल-बाल बच गई, जब थाना परिसर में स्थित पुराने बैरक की छत अचानक भरभराकर गिर गई।

    हादसे के समय कुछ जवान रसोई में भोजन बना रहे थे, तो कुछ खाना खा रहे थे। महज दो सेकेंड पहले बाहर निकल जाने के कारण जवानों की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया।

    मलबे में दबे चौकी व बर्तन, खौफ में जवान

    घटना रात करीब 9:30 बजे की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैरक में एएसआई (ASI) लालबाबू भट्ट सहित कई जवान खाना तैयार कर रहे थे। तभी अचानक छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा। छत गिरते ही मलबे में चौकी, बर्तन और जवानों के अन्य सामान दब गए। ज़ोरदार आवाज़ और शोर सुनकर जवान तुरंत बाहर की ओर भागे और अपनी जान बचाई।

    इस जर्जर बैरक में रेल थाने के लगभग 20 जवान रहते हैं। घटना के बाद पुलिसकर्मी शिवशंकर दुबे और सुनील हांसदा ने आपबीती सुनाते हुए कहा, अगर बाहर निकलने में 2 सेकेंड की भी देरी हो जाती, तो कोई न कोई मलबे में दब जाता। इसके बाद शायद रेलवे के सभी वरिष्ठ अधिकारी हमें सलामी देने यहां पहुंचते।

    18 घंटे बाद भी सुध लेने नहीं पहुंचा रेलवे प्रशासन

    घटना के 18 घंटे बीत जाने के बावजूद रेलवे का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी स्थिति का जायजा लेने या जवानों की सुध लेने मौके पर नहीं पहुंचा। एएसआई लालबाबू भट्ट ने बताया कि बैरक की हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और जवान खौफ के साए में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।

    उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार रेलवे के आईडब्ल्यूआई (IWI) को पत्र लिखकर मरम्मत कराने का अनुरोध किया गया है, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं की गई। घटना से आक्रोशित रेल पुलिस के जवानों ने रेलवे प्रबंधन पर उपेक्षा और भेदभाव करने का भी गंभीर आरोप लगाया है।