रांची में धनतेरस की धूम, इस शुभ मुहूर्त में खरीदें सोना-चांदी और बर्तन; देखें राजधानी के बाजार का हाल!
Diwali & Dhanteras Shopping: धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा, जिसमें रांची में खरीदारी और पूजा के शुभ ...और पढ़ें

सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय शाम 5:07 से 7:03 बजे तक।
HighLights
धनतेरस 6 नवंबर को, रांची में खरीदारी और पूजा के मुहूर्त।
शाम 6:03 से 7:59 बजे तक वृष लग्न में होगी धनतेरस पूजा।
सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय शाम 5:07 से 7:03 बजे तक।
जागरण संवाददाता, रांची। दीपावली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत छह नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, वाहन, बर्तन और घरेलू उपयोग के सामान खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं, आठ नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी।
सात नवंबर को नरक चतुर्दशी का पर्व होगा। आचार्य पंडित प्रणव मिश्रा बताते हैं कि धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाएगी।
मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। पूजा के लिए शाम 6:03 से रात 7:59 बजे तक का समय निर्धारित है। इस अवधि में स्थिर वृष लग्न रहेगा।
खरीदारी के शुभ मुहूर्त
- सोना-चांदी और आभूषण : शाम 5:07 से 7:03 बजे तक।
- वाहन : सुबह 10:44 बजे, दोपहर 12:31 बजे अथवा दोपहर 3:30 से शाम 5:07 बजे तक।
- इलेक्ट्रानिक्स : सुबह 8:39 से 10:02 बजे, 11:26 से 12:49 बजे और दोपहर 3:30 से शाम 5:07 बजे तक।
- बर्तन : शाम 5:07 से रात 9:16 बजे तक।
- झाड़ू : दोपहर 12:31 से 2:02 बजे और शाम 5:07 से 7:03 बजे तक।
धनतेरस को लेकर रांची के बाजारों में सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रानिक्स और वाहनों की खरीदारी की तैयारी है। परंपरा के अनुसार लोग इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार नई वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। इसके बाद सात नवंबर को नरक चतुर्दशी और आठ नवंबर को दीपावली पर घरों में दीप जलाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।
दिया और झालर से जगमगाएंगे घर, बाजार में बढ़ी दीपावली की रौनक
दीपावली को लेकर राजधानी के बाजारों में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर की दुकानों में मिट्टी के दीये, रंगीन कैंडल, झालर और इलेक्ट्रिक लाइट की दुकानें सजने लगी हैं। बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों से लेकर डिजाइनर दीयों तक की कई वैरायटी उपलब्ध हैं।
सामान्य मिट्टी का दीया डेढ़ रुपये प्रति पीस मिल रहा है, जबकि डिजाइनर दीयों की कीमत 10 रुपये से शुरू है। इसके अलावा रंगोली बनाने के लिए अलग-अलग रंगों के साथ डिजाइन वाले सांचे भी बिक रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि दीपावली के नजदीक आते ही दीयों की मांग बढ़ेगी। इसे देखते हुए अभी से पर्याप्त स्टाक रखा गया है।
दुकानों में 10 हजार से अधिक दीये मंगाए गए हैं। मांग बढ़ने पर दोबारा स्टाक मंगाया जाएगा। दुकानदारों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दीयों की कीमत में करीब 50 पैसे प्रति पीस की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि मांग में कोई खास अंतर नहीं आया है।
वहीं, दिया बनाने वाले कुम्हार ने बताया इस बार भी आर्डर पिछले वर्ष की तरह ही है कोई खास अंतर नहीं आया। उनका कहना है कि दिया बनाने से ज्यादा खरीदकर बेचने में लाभ है, क्योंकि रांची में दिया बनाने योग्य मिट्टी बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में मिट्टी नहीं मिल पाता।
अगर मिट्टी मिलता भी है तो कीमत अधिक के होने के कारण मुनाफा करना मुश्किल होता है। इसलिए रामगढ़, मांडर, गुमला, और बंगाल से दिए मंगवा कर ही बेचने में ठीक बचत होती है।वहीं, बाजार में रंग-बिरंगी इलेक्ट्रिक लाइट भी लोग खरीद रहे हैं।
इलेक्ट्रिक लाइट की कीमत 40 रुपये से शुरू है। इनमें क्यूब डिजाइन वाली लड़ी लोगों को खूब पसंद आ रही है। हालांकि, इलेक्ट्रिक दीयों की तुलना में पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग अभी भी अधिक बनी हुई है। झालर की कीमत 150 रुपये से शुरू होकर 1500 रुपये तक है। लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं 200 रुपये से पांच हजार रुपए तक उपलब्ध हैं।
लाइट वाली दिया भले ही सजावट के लिए लोग खरीद रहे है, लेकिन मिट्टी के दिए की डिमांड अभी भी उसी स्तर पर है, इसमें कोई बदलाव नहीं है।
-मुन्ना सिंह, पूजा भंडार चर्च रोड
दीपावली पर घी और तेल के दीयों का खास महत्व
दीपावली पर दीपक जलाने की परंपरा केवल घर को रोशन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। इस दिन घरों, मंदिरों और मुख्य दरवाजों पर मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा में गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इसे सात्विकता, पवित्रता और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
वहीं, घर के बाहर सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। तिल के तेल का भी विशेष महत्व है। पंडित राजा राम शास्त्री ने बताया कि दीपक की दिशा को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं।
पूर्व दिशा में दीपक जलाना ज्ञान और आरोग्य, जबकि उत्तर दिशा में जलाना धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। धनतेरस पर दक्षिण दिशा में यम दीपक जलाने की भी परंपरा है। दिवाली में करंज तेल से दीपक जलाने की पुरानी परंपरा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर रहती है।
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