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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    'हेमंत की गाड़ी में मिले पैसे ED-BJP ने रखे', झारखंड CM के दिल्ली आवास से मिली नोटों की गड्डी पर गरमाई सियासत

    By Pradeep singh Edited By: Shashank Shekhar
    Updated: Tue, 30 Jan 2024 08:20 PM (IST)

    हेमंत सोरेन को लापता बताते हुए सुराग देने वाले को 11 हजार रुपये देने संबंधी बाबूलाल मरांडी की टिप्पणी पर झामुमो महासचिव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और गो ...और पढ़ें

    झारखंड CM के दिल्ली आवास से मिली नोटों की गड्डी पर गरमाई सियासत (फाइल फोटो)
    झारखंड CM के दिल्ली आवास से मिली नोटों की गड्डी पर गरमाई सियासत (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. मुख्यमंत्री एक व्यक्ति नहीं एक संवैधानिक संस्थान हैं- सुप्रियो भट्टाचार्य
    2. राज्य की विधि व्यवस्था 40 घंटे में कैसे खराब हो गई?- सुप्रियो भट्टाचार्य

    राज्य ब्यूरो, रांची। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दावा किया है कि दिल्ली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास से मिला पैसा ईडी और भाजपा ने प्लांट किया है। महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पलटवार करते हुए कहा कि सीएम रहते बाबूलाल मरांडी कहां-कहां जाते थे, उन्होंने कभी किसी को नहीं बताया।

    सीएम हेमंत सोरेन को लापता बताते हुए सुराग देने वाले को 11 हजार रुपये देने संबंधी बाबूलाल मरांडी की टिप्पणी पर झामुमो महासचिव ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के विरुद्ध पार्टी मुकदमा दर्ज कराएगी। राजनीति में इतना घटिया स्तर पर कभी नहीं देखा गया। यह भी कहा कि बाबूलाल मरांडी के दिमाग का इलाज करने वाले मनोचिकित्सक को पार्टी 11 लाख रुपये देगी।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एक व्यक्ति नहीं एक संवैधानिक संस्थान हैं। मुख्यमंत्री एक व्यक्ति भी हैं, हर किसी का निजी जिदंगी और दिनचर्या होती है, बार-बार कहा जा रहा है कि वे निजी काम से गए हुए थे। भाजपा के लोगों ने एक सीएम के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है। इनलोगों की भाषा गलत है। सवाल उठाया कि क्या एक सीएम भाजपा कार्यालय जाकर बायोमैट्रिक्स में उपस्थिति दर्ज कराएगा?

    राज्यपाल को भी निशाने पर लिया

    झामुमो महासचिव ने राज्यपाल को भी निशाने पर लिया। कहा कि वे मुख्य सचिव और डीजीपी को बुलाते हैं। जरा उन्हें राज्य की जनता को यह भी बताना चाहिए कि उन्हें कैसे लगा रहा है कि राज्य की विधि व्यवस्था 40 घंटे में कैसे खराब हो गई? इस दौरान कहां कौन सी ऐसी घटना हुई जिससे यह प्रतीत होता है कि विधि-व्यवस्था फेल हो चुकी है।

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