केसरिया का विराट रामायण मंदिर दूर है तो क्या, झारखंड के इन 10 भव्य मंदिरों में करें प्रभु श्रीराम का दर्शन
Jharkhand बिहार के केसरिया में विराट रामायण मंदिर का निर्माण दुनियाभर में चर्चा में है। ऐसे में झारखंडके राम मंदिरों को जानना भी लाजिमी है। राज्य में ...और पढ़ें

चिटाही रामराज मंदिर इतिहास, वास्तुकला और भक्ति का संगम।

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डिजिटल डेस्क, रांची। पड़ोसी राज्य बिहार में विराट रामायण मंदिर का निर्माण दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक चमत्कार बनकर उभर रहा है, झारखंड भी राम भक्ति की धारा में सराबोर है।
यहां के राम मंदिर न सिर्फ प्राचीन इतिहास से जुड़े हैं, बल्कि आधुनिक भव्यता से भी जगमगा रहे हैं। राजधानी रांची में अयोध्या शैली के मंदिरों की चमक से लेकर दूरदराज के जिलों में रामायण से जुड़े पौराणिक स्थल तक, ये मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र हैं।
रामनवमी पर यहां का माहौल देखते ही बनता है। जुलूस, मेले और 'जय श्री राम' की गूंज से हवा राममय हो जाती है। आइए, झारखंड के 10 सबसे भव्य राम मंदिरों की रोचक कहानी जानें, जहां वास्तुकला, इतिहास और भक्ति का अनोखा संगम है।
राज्य की धार्मिक विरासत में भगवान राम के मंदिर विशेष स्थान रखते हैं। राजधानी रांची में अधिकांश प्रमुख और भव्य राम मंदिर केंद्रित हैं, जहां अयोध्या शैली की वास्तुकला, विशाल परिसर और रामनवमी पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
अन्य जिलों में भी रामायण से जुड़े ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले मंदिर हैं। यहां लोकप्रियता, वास्तुकला, आकार, निर्माण स्तर और भक्तों की भीड़ के आधार पर झारखंड के सबसे भव्य और प्रमुख राम मंदिरों की विस्तृत सूची दी गई है।
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1. तपोवन राम-जानकी मंदिर (निवारणपुर, रांची)

झारखंड का 'राम राजधानी' कहलाने वाला यह मंदिर राज्य का सबसे प्रसिद्ध और भव्य आकर्षण है, जिसे "मिनी अयोध्या" की उपमा दी जाती है।
लगभग 286 वर्ष पुराना यह प्राचीन स्थल है, जहां राम-जानकी की प्रतिमाएं धरती से स्वयं प्रकट होने की रोचक किंवदंती जुड़ी है। वर्तमान में अयोध्या राम मंदिर की तर्ज पर इसका भव्य पुनर्निर्माण हो रहा है।
मकराना मार्बल से 13 से ज्यादा शिखर बनाए जा रहे हैं, जिसकी डिजाइन अयोध्या के मशहूर आर्किटेक्ट सीवी सोनपुरा और आशीष सोनपुरा की निगरानी में तैयार की गई है।
100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 2028-29 तक पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों हुए भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ था। रामनवमी पर यहां का नजारा अविस्मरणीय होता है, जब लाखों की संख्या में भक्त पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों के साथ विशाल जुलूस लेकर यहां पहुंचते हैं।
2. प्राचीन राम मंदिर (चुटिया, रांची)

रांची का सबसे पुराना राम मंदिर, जो 400 से ज्यादा सालों के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है। इसकी स्थापना 1687 ईस्वी के आसपास नागवंशी राजाओं द्वारा कराई गई थी।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में महान संत चैतन्य महाप्रभु ने भी यहां विश्राम किया था। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां राम और शिव का अद्भुत संगम है, जो प्राचीन स्थापत्य कला के माध्यम से इतिहास की जीवंत गलियों का अहसास कराता है।
रामनवमी के अवसर पर यहां सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार भव्य मेला लगता है और पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल व्याप्त रहता है।
3. पतरातु रोड राम मंदिर (रांची)
रांची के रातू रोड से पतरातु जाने वाले मार्ग पर स्थित यह मंदिर अपनी आधुनिक भव्यता और अयोध्या शैली की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
मंदिर का परिसर काफी विशाल है, जहां नियमित रूप से हवन, सुंदरकांड पाठ और सत्संग का आयोजन होता रहता है। यहां का विशेष 'लड्डू प्रसाद' इतना प्रसिद्ध है कि शहर के कोने-कोने से लोग इसे लेने आते हैं।
संत जेवियर कॉलेज और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के पास स्थित होने के कारण यहां युवाओं की भारी उपस्थिति देखी जाती है, जो आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच यहां शांति की तलाश में आते हैं।
4. निवारणपुर राम मंदिर (रांची)
तपोवन मंदिर के बिल्कुल समीप स्थित निवारणपुर का यह राम मंदिर भी अयोध्या के मंदिर मॉडल से प्रेरित है। यह मंदिर एक बहुत बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां का शांत और स्वच्छ वातावरण भक्तों को एकाग्रता के साथ पूजा करने का अवसर देता है।
मंदिर समिति द्वारा यहां नियमित अंतराल पर बड़े धार्मिक अनुष्ठान और भंडारे आयोजित किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां आकर की गई प्रार्थनाएं कभी खाली नहीं जातीं और भक्तों के दुखों का 'निवारण' होता है, जो इस स्थान के नाम को सार्थक करता है।
5. श्री रामराज मंदिर, चिटाही धाम (धनबाद)

धनबाद जिले का यह सबसे बड़ा और प्रमुख राम मंदिर है, जिसकी जड़ें 100 साल से भी अधिक पुरानी हैं। साल 2019 में इस मंदिर का पुनरुद्धार कर इसे बेहद भव्य रूप दिया गया।
सफेद संगमरमर से बनी मूर्तियों और कलात्मक स्तंभों के कारण यह मंदिर पूरे कोयलांचल में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां रोजाना हजारों की संख्या में दर्शनार्थी आते हैं।
मंदिर के विशाल परिसर में रामराज की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया गया है, जहां रामायण के विभिन्न प्रसंगों को चित्रों और मूर्तियों के माध्यम से दर्शाया गया है।
6. ओरमांझी राम मंदिर (रांची के पास, ओरमांझी प्रखंड)
रांची-हजारीबाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ओरमांझी का यह नया राम मंदिर अपनी आधुनिक इंजीनियरिंग और पारंपरिक कला के मेल का अद्भुत उदाहरण है।
यह मंदिर अभी निर्माणाधीन अवस्था में है लेकिन इसका ढांचा इतना भव्य है कि यह दूर से ही राहगीरों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
मंदिर परिसर में हाई-टेक सुविधाओं के साथ-साथ एक बड़े उद्यान और ध्यान केंद्र की भी योजना है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में गिना जाएगा।
7. रामरेखा धाम राम मंदिर (सिमडेगा)
पौराणिक दृष्टिकोण से यह झारखंड का सबसे महत्वपूर्ण स्थल है। सिमडेगा से लगभग 28 किमी दूर स्थित यह धाम सीधे तौर पर प्रभु राम के वनवास काल से जुड़ा है।
लोक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ समय यहां व्यतीत किया था। यहां आज भी प्रभु राम के पदचिह्न, प्राचीन अग्नि कुंड, सीता चूल्हा और गुप्त गंगा जैसे साक्ष्य मौजूद हैं।
यह मंदिर घने जंगलों और पहाड़ों के बीच स्थित है, जो भक्तों को त्रेतायुग की याद दिलाता है। कार्तिक पूर्णिमा और रामनवमी पर यहां अंतरराज्यीय मेला लगता है।
8. रामतीर्थ मंदिर (चाईबासा के पास)
पश्चिमी सिंहभूम जिले में बैतरणी नदी के तट पर स्थित रामतीर्थ मंदिर का प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक महत्व अतुलनीय है। यहां चार प्रमुख मंदिरों का एक समूह है, जिनके बारे में कहा जाता है कि प्रभु राम ने स्वयं यहां पूजा की थी।
मकर संक्रांति के अवसर पर यहां लगने वाला विशाल मेला पूरे झारखंड और पड़ोसी राज्य ओडिशा में प्रसिद्ध है। नदी की कलकल ध्वनि और ढलते सूरज के समय मंदिर की घंटियों की गूंज एक अलौकिक अनुभव प्रदान करती है।
9. कोडरमा राम मंदिर (कोडरमा)
कोडरमा जिले का यह राम मंदिर स्थानीय समुदाय की आस्था का मुख्य केंद्र है। यह मंदिर अपनी साफ-सफाई, भव्य साज-सज्जा और व्यवस्थित प्रबंधन के लिए जाना जाता है।
यहां नियमित रूप से धार्मिक कथाओं और अखंड कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं और बुजुर्ग भाग लेते हैं।
मंदिर के निर्माण में राजस्थानी कारीगरी की झलक देखने को मिलती है, जो इसे जिले के अन्य मंदिरों से अलग और भव्य बनाती है।
10. सूर्य मंदिर (बुंडू, रांची के पास रामकथा की जड़ें)
टाटा-रांची मार्ग पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी 'रथ' जैसी आकृति के लिए विश्व विख्यात है। हालांकि यह मुख्य रूप से सूर्य मंदिर है, लेकिन इसकी जड़ें रामकथा से जुड़ी हैं।
मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम ने यहां रुककर सूर्य देव की आराधना की थी। मंदिर परिसर में स्थित रामकुंड का विशेष धार्मिक महत्व है।
यहां की वास्तुकला इतनी सुंदर है कि इसे 'झारखंड का कोणार्क' भी कहा जाता है। राम भक्तों के लिए यह स्थान सूर्य और राम की अटूट श्रद्धा का संगम है।

रांची के निवारणपुर में अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर बनने जा रहे तपोवन मंदिरका प्रारूप। (तस्वीरें: संजय सुमन/अमित सिन्हा)