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तिरंगे में लिपटा रांची पहुंचा असम राइफल्स के जवान का पार्थिव शरीर, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

Published: Sat, 22 Aug 2026 10:15 PM (IST)

हवलदार देवचरण उरांव का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव मान्हा में सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

असम राइफल्स के जवान का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार। (जागरण)

असम राइफल्स के जवान का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार। (जागरण)

HighLights

  1. हवलदार देवचरण उरांव का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार।

  2. मणिपुर में ड्यूटी के दौरान निधन, गांव में शोक की लहर।

  3. रांची के मान्हा गांव में दी गई अंतिम विदाई।

जागरण संवाददाता, कांके। पिठोरिया थाना क्षेत्र के मान्हा गांव निवासी 57 वर्षीय हवलदार देवचरण उरांव का शनिवार को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

मणिपुर में ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उपचार के क्रम में 20 अगस्त को उनका निधन हो गया था। शनिवार दोपहर करीब दो बजे उनके पैतृक गांव मान्हा स्थित मसना में आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

मणिपुर और रांची के नामकुम से पहुंची सैन्य टुकड़ी ने हवलदार देवचरण उरांव को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, सैन्यकर्मी और परिजन मौजूद रहे।

सेना अस्पताल में चल रहा था इलाज

मृतक के पुत्र हरिश्चन्द्र उरांव, जो वर्तमान में श्रीनगर में सेना में तैनात हैं, ने बताया कि उनके पिता 32 असम राइफल्स में हवलदार के पद पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए नागालैंड स्थित सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इलाज के दौरान 20 अगस्त को उनका निधन हो गया। हरिश्चन्द्र ने बताया कि 19 अगस्त को वीडियो कॉल के माध्यम से उन्होंने आखिरी बार अपने पिता से बातचीत की थी।

इसके अगले ही दिन यूनिट की ओर से उनके मोबाइल पर पिता के निधन की सूचना मिली। खबर मिलते ही मान्हा गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

तिरंगे में लिपटा शव पहुंचते ही गमगीन हुआ गांव

परिजनों के अनुसार, हवलदार देवचरण उरांव का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे रांची एयरपोर्ट लाया गया। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान देने के बाद सैनिकों की टीम एंबुलेंस से मान्हा गांव के लिए रवाना हुई।

कांके रिंग रोड पहुंचते ही पहले से इंतजार कर रहे दर्जनों ग्रामीणों ने शहीद देवचरण उरांव अमर रहें और भारत माता की जय के नारे लगाए।

ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दर्जनों मोटरसाइकिल सवार युवक पार्थिव शरीर के साथ मान्हा स्थित उनके पैतृक आवास तक पहुंचे।

पत्नी, पुत्र और तीन बेटियों को छोड़ गए

हवलदार देवचरण उरांव अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और तीन विवाहित बेटियों को छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक का माहौल है।

अंतिम संस्कार के दौरान असम राइफल्स और रांची-नामकुम से नायब सूबेदार सतीश कुमार के नेतृत्व में करीब 20 जवान मौजूद रहे।

कांके के अंचलाधिकारी अमित भगत, मुखिया, परिजन और आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने भी अंतिम विदाई दी।

श्रद्धांजलि देने वालों में अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के सुरेंद्र लिंडा, राजू टोप्पो, किशुन लिंडा, वीरेंद्र उरांव, रमेश उरांव, रंजीत मिंज, संजय कच्छप, कार्तिक उरांव, रवि मिंज, बबलू उरांव, हरेन्द्र उरांव, सुधीर उरांव, महादेव उरांव, ज्योति कच्छप, किरण, प्रतिमा, राशनी, डहरी और सलगी उरांव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।

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