रांची में HEC की जमीन पर अवैध कब्जे रोकने के लिए अब आसमान से होगी निगरानी, ISRO से सहयोग; मंत्रालय गंभीर
एचईसी अपनी खाली जमीन पर बढ़ते अवैध कब्जों को रोकने और परिसंपत्तियों का आकलन करने के लिए सैटेलाइट सर्वे कराएगा। ...और पढ़ें

सर्वे को लेकर मंत्रालय गंभीर, जमीन से संबंधित अपडेट रिपोर्ट प्रबंधन से मांगा।
HighLights
एचईसी खाली जमीन पर अवैध कब्जे रोकने को सैटेलाइट सर्वे कराएगा।
इसरो के सहयोग से जमीन की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा।
सर्वे से राजस्व जुटाने और अतिक्रमण हटाने की योजना बनेगी।
जागरण संवाददाता, रांची। एचईसी की जमीन पर अब आसमान से नजर रखी जाएगी। खाली भूखंडों पर लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जे को रोकने और अपनी बेशकीमती परिसंपत्तियों का वास्तविक आकलन करने के लिए एचईसी प्रबंधन खाली जमीन का सेटेलाइट सर्वे कराने की तैयारी में है। इस काम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) समेत संबंधित एजेंसियों का सहयोग लिया जाएगा।
सर्वे के बाद यह तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकेगी कि एचईसी की कौन-कौन सी जमीन खाली है, कहां कब्जा हो चुका है और पिछले कुछ वर्षों में किस क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ा है। भारी उद्योग मंत्रालय की संसदीय टीम से भी एचईसी प्रबंधन ने जमीन का सेटेलाइट सर्वे कराने का आग्रह किया, जिसके बाद सेटेलाइट सर्वे को लेकर मंत्रालय ने कार्रवाई शुरू कर दिया है।
एचईसी प्रबंधन ने जमीन सहित अन्य परिसंपत्तियों का विस्तृत अपडेट आंकड़ा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। एचईसी की जमीन को लेकर प्रबंधन की ओर से तैयार की गई परिसंपत्ति रिपोर्ट में बड़ी मात्रा में जमीन पर अवैध कब्जे की स्थिति सामने आई है।
खासकर खाली भूखंडों पर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से कब्जे की शिकायतें मिली हैं। कई स्थानों पर बस्तियां तक बस गई हैं। ऐसे में जमीन की मौके पर निगरानी करना एचईसी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
संसाधनों की कमी के कारण कंपनी सभी भूखंडों की नियमित निगरानी नहीं कर पा रही है। अब सेटेलाइट सर्वे सिर्फ कब्जा तलाशने का माध्यम नहीं होगा, बल्कि एचईसी की जमीन को सुरक्षित रखने और उससे राजस्व जुटाने की पूरी योजना का आधार बन सकता है।
अंतरिक्ष से दिखेगी जमीन की पूरी तस्वीर
सेटेलाइट सर्वे के जरिए एचईसी की जमीन का डिजिटल मैप तैयार करने की योजना है। इसमें खाली भूखंडों, पहले से विकसित क्षेत्र और नए कब्जे वाले इलाकों की पहचान करने में मदद मिलेगी। पुराने सर्वे के आंकड़ों से वर्तमान तस्वीर का मिलान कर यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कितनी जमीन पर नए सिरे से कब्जा हुआ है।
प्रबंधन ने खाली जमीन के सेटेलाइट सर्वे के लिए भारी उद्योग मंत्रालय को पत्र लिखा है। मंत्रालय स्तर पर पहले भी इसरो सहित अन्य एजेंसियों से संपर्क किया गया था। अब एचईसी की परिसंपत्तियों से पूंजी जुटाने की योजना को देखते हुए इस सर्वे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुमति मिलने के बाद सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जमीन की निगरानी से लेकर लीज तक
एचईसी अपनी खाली जमीन को भविष्य की आय का बड़ा स्रोत बनाना चाहता है। प्रबंधन खाली भूखंडों को लीज पर देकर राजस्व जुटाने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्तावित लीज दर करीब 12 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक रखी गई है। इससे कंपनी को कार्यशील पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि जमीन की सही स्थिति जानना एचईसी के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
कौन सी जमीन वास्तव में खाली है और कौन सी जमीन कब्जे में चली गई, इसका सटीक रिकार्ड तैयार होने के बाद ही लीज की योजना को जमीन पर उतारना आसान होगा। सेटेलाइट सर्वे के बाद जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट करने की भी संभावना है।
2016 के सर्वे से अब तक बढ़ी चुनौती
एचईसी ने वर्ष 2016 में जमीन का सर्वे कराया था। उस समय करीब 74 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे की बात सामने आई थी। इसके बाद खाली जमीन पर कब्जे का दायरा बढ़ने की बात प्रबंधन की रिपोर्ट में सामने आई है।
वर्तमान स्थिति का वास्तविक आकलन सेटेलाइट सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा। आकलन के अनुसार एचईसी की 1000 एकड़ से ज्यादा खाली जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। अवैध कब्जा हटाने के लिए एचईसी ने जिला प्रशासन से मजिस्ट्रेट और पुलिस बल उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया है।
पीएमओ स्तर पर भी जमीन के मुद्दे को गंभीरता से लिए जाने के बाद प्रबंधन को उम्मीद है कि सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को गति मिलेगी।
1800 करोड़ की जमीन पर नजर
एचईसी ने खाली जमीन को लीज पर देने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर का आकलन किया है। इस हिसाब से कब्जे के दायरे में बताई जा रही करीब 150 एकड़ खाली जमीन की संभावित कीमत 1800 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि जमीन की वास्तविक स्थिति, क्षेत्रफल और कब्जे की सीमा का अंतिम आकलन सेटेलाइट सर्वे के बाद ही किया जा सकेगा।
