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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jharkhand News: हेमंत सरकार ने मनरेगा मजदूरों को दी खुशखबरी, अब मिलेगा पहले से डेढ़ गुना अधिक भुगतान

    Updated: Sun, 23 Feb 2025 12:15 PM (GMT+05:30)

    झारखंड में मनरेगा मजदूरी दर में बढ़ोतरी की जाएगी जिससे श्रमिकों को कम मेहनत पर अधिक मजदूरी मिलेगी। नए मानकों के तहत अब 73 सीएफटी की बजाय 50.4 सीएफटी म ...और पढ़ें

    हेमंत सरकार ने मनरेगा मजदूरों को दी खुशखबरी। (सांकेतिक फोटो जागरण)
    हेमंत सरकार ने मनरेगा मजदूरों को दी खुशखबरी। (सांकेतिक फोटो जागरण)

    HighLights

    1. पहाड़ी और पठारी क्षेत्र की अधिकता के आधार पर हुआ परिवर्तन का निर्णय
    2. पहले प्रतिदिन 73 सीएफटी मिट्टी काटना अनिवार्य था, अब सिर्फ 50 सीएफटी

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड के मनरेगा श्रमिकों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें पहले की तुलना में अब कम काम करने पर भी उतनी ही राशि मिलेगी, जितनी पूर्व में मिल रही थी।

    नई गणना के अनुसार अब पहले की तुलना में डेढ़ गुना कम काम करने पर भी उतना ही मेहनताना मिलेगा, जितना पूर्व में मिलता था। पूर्व में मनरेगा मजदूरों को 73 सीएफटी मिट्टी काटने पर एक दिन की हाजिरी मानी जाती थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 50.4 सीएफटी पर सीमित हो गया है।

    दिव्यांग जनों और महिलाओं के लिए आंकड़ा और भी कम हो गया है, इन्हें एक दिन की मजदूरी के लिए अब कम मेहनत करना होगा।  मनरेगा के तहत टाइम एंड मोशन स्टडी (टीएमएस) के माध्यम से पूरे देश में मजूदरी तय की जा रही है।

    कम श्रम पर अधिक भुगतान

    झारखंड में इसके माध्यम से यह निर्धारित हो चुका है कि अब एक दिन की हाजिरी के लिए मजूदरों को 50.4 सीएफटी मिट्टी काटना होगा। जाहिर बात है कि मेहनत कम करना होगा। आंकड़ों की तुलना करें तो पहले से 45 प्रतिशत कम मेहनत पर ही एक दिन की हाजिरी निकल जाएगी।

    इस प्रकार मजदूरों के पूर्व की तुलना में डेढ़ गुना अधिक तक भुगतान होने की संभावना बन गई है। हेमंत सोरेन सरकार लगातार इसके लिए केंद्र से संपर्क में थी और इन्हीं प्रयासों के आधार पर यह सफलता मिली है।

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    ग्रामीण विकास मंत्रालय में सचिव शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी इस मामले में राज्य सरकार के पक्ष को सुना और झारखंड की दावेदारी को लेकर सकारात्मक रुख अख्तियार किए रहे।

    झारखंड के अधिकतर ग्रामीण इलाकों में पठारी और पहाड़ी इलाके शामिल हैं। इन इलाकों में मिट्टी कोड़ने का काम बहुत ही मेहनत का है। सामान्य मैदानी इलाकों से कहीं अधिक यहां के श्रमिकों को मेहनत करनी पड़ती है और यह प्रमाणित होने के बाद झारखंड के मजदूरों को यह लाभ मिलेगा। -   मृत्युंजय वर्णवाल, मनरेगा आयुक्त।

    अपार्टमेंट में एसी फिट करने के दौरान गिरकर मजदूर की मौत

    वहीं दूसरी ओर बिसरा के बंडामुंडा में नव निर्मित अपार्टमेंट में शनिवार की शाम एसी फिट करने के दौरान दूसरी मंजिल से गिरने के कारण एक मजदूर की मौत हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने पर बंडामुंडा पुलिस मौके पर पहुंची और मजदूर के शव को अपने कब्जे में लेकर एंबुलेंस के जरिए पोस्टमार्टम के लिए राउरकेला सरकारी अस्पताल भेज दिया।

    मजदूर की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। अपार्टमेंट में मजदूर से बगैर सुरक्षा के काम कराया जा रहा था। जिसके कारण मजदूर दूसरी मंजिल से काम करते समय गिर गया। सिर पर गंभीर चोट आने के कारण घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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