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    20 साल से आईएसएम में संविदा पर नौकरी करने वालों को करें नियमित: झारखंड हाई कोर्ट

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 08:22 PM (GMT+05:30)

    उच्च न्यायालय ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को 20 वर्षों से कार्यरत संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया ...और पढ़ें

    झारखंड हाईकेर्ट का बड़ा फैसला। जागरण

    झारखंड हाईकेर्ट का बड़ा फैसला। जागरण

    HighLights

    1. आईआईटी धनबाद के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश।

    2. 20 वर्षों की सेवा अवधि को सेवानिवृत्ति लाभों में जोड़ा जाएगा।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 20 वर्ष से संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के हक में निर्णय सुनाया है। अदालत ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं तो कर्मचारियों के समायोजन के लिए अधिसंख्य (सुपरन्यूमेरेरी) पद सृजित किए जाएं। अदालत ने कहा कि आउटसोर्सिंग की आड़ में कर्मचारियों को वर्षों तक उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को सेवा निरंतरता और सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जोड़ने का भी निर्देश दिया।

    इसको लेकर शक्तिनाथ महतो एवं छह अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। सभी याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति उनके स्वजनों की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में हुई थी। वर्ष 2001 से 2017 तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कराने के बाद उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग व्यवस्था में डाल दिया गया था।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर और अनुराग कुमार ने कहा कि कर्मचारी पिछले 20 वर्षों से संस्थान में स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहे हैं, फिर भी उन्हें नियमित नहीं किया गया।

    इस पर अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक लगातार एक ही प्रकृति का कार्य कराया जाना इस बात का प्रमाण है कि उनकी सेवाओं की आवश्यकता स्थायी है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कर्मचारियों को कम वेतन देने और उनके वैधानिक अधिकारों से बचने के लिए नहीं किया जा सकता।

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    अदालत ने यह भी माना कि 20 वर्षों तक संतोषजनक सेवा देने के बाद प्रारंभिक शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियमितीकरण से इंकार करना न्यायसंगत नहीं होगा।

    अदालत ने संस्थान की ओर से स्वीकृत रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने की दलील भी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी दो दशक से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहा है तो उस कार्य को स्वीकृत कार्य माना जाएगा और केवल तकनीकी आधार पर नियमितीकरण नहीं रोका जा सकता।