यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने सरकार के शर्त को हटाया; कहा- यह UGC के नियमों के खिलाफ
झारखंड हाईकोर्ट से विश्वविद्यालय के शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। प्रोन्नति एवं अन्य वित्तीय लाभ के मामले में सरकार के द्वारा बनाए गए शर्त को कानून स ...और पढ़ें

HighLights
- शिक्षकों को प्रोन्नति का लाभ देय तिथि से ही मिलेगा- हाईकोर्ट
- सरकार की परिनियम की शर्त यूजीसी के नियमों के खिलाफ- हाई कोर्ट
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट से राज्य के विश्वविद्यालय के शिक्षकों को प्रोन्नति एवं अन्य वित्तीय लाभ के मामले में बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने सरकार के द्वारा बनाए गए परिनियम के खंड तीन की शर्त को कानून सम्मत नहीं बताते हुए उसे निरस्त कर दिया है।
हाई कोर्ट के आदेश को बाद राज्य के शिक्षकों को एक दिसंबर 2009 से अगस्त 2021 के बीच प्रोन्नति या अन्य वित्तीय लाभ उसी दिन से मिलेगा, जिस दिन से उन्हें प्रोन्नति या अन्य वित्तीय लाभ देय है।
इस संबंध में कलानंद ठाकुर एवं अन्य ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि शिक्षकों की प्रोन्नति से संबंधित यूजीसी के वर्ष 2010 के नियम के तहत झारखंड सरकार ने परिनियम बनाया था। इस परिनियम में एक शर्त लगा गई थी। इसमें कहा गया था कि एक दिसंबर 2009 से अगस्त 2021 के बीच प्रोन्नति या अन्य वित्तीय लाभ 15 दिसंबर 2022 से देय होगा।
राज्य सरकार इस तरह की शर्त नहीं लगा सकती- प्रार्थी
प्रार्थियों का कहना था कि राज्य सरकार इस तरह की शर्त नहीं लगा सकती। सरकार की परिनियम की यह शर्त यूजीसी के नियमों के खिलाफ है और यह समानता के अधिकार का हनन है। राज्य सरकार के विलंब से परिनियम बनाने का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है, जो गलत है।
सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार के परिनियम के खंड़ तीन की शर्त को निरस्त कर दिया। अदालत ने सरकार के प्रोन्नति से जुड़े और अन्य वित्तीय लाभ देय तिथि से भुगतान करने का निर्देश दिया।
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