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    सावधान! त्‍योहार आते ही ओडिशा और बंगाल से खपाया जा रहा नकली पनीर, सेहत से खिलवाड़

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 09:27 PM (IST)

    होली के करीब आते ही रामगढ़ के बाजारों में नकली पनीर, खोवा और केमिकल युक्त दूध की बिक्री बढ़ गई है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आ रहे ये मिलावटी उत्पाद स् ...और पढ़ें

    नकली पनीर।

    नकली पनीर।

    HighLights

    1. रामगढ़ में नकली पनीर, खोवा, केमिकल दूध की बिक्री।

    2. खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्ती से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा।

    जागरण संवाददाता, रांची। रंगों का त्योहार होली करीब आते ही बाजार गुलजार हैं, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे मिलावटखोरी का एक काला कारोबार भी तेजी से पैर पसार रहा है। रामगढ़ के प्रतिष्ठानों से लेकर गलियों के ठेलों तक, नकली पनीर, खोवा और केमिकल युक्त दूध की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। 

    पड़ोसी राज्यों से पहुंच रहा 'सफेद जहर' 

    ताज्जुब की बात यह है कि प्रशासन की कार्रवाई महज खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है। जांच में यह बात सामने आई है कि रामगढ़ के बाजारों में ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भारी मात्रा में नकली पनीर और खोवा की खेप पहुंचाई जा रही है। 
     
    हाल ही में फूड सेफ्टी विभाग ने हजारों क्विंटल नकली पनीर जब्त कर खेतों में नष्ट किया था। मिलावटखोर पनीर बनाने में अरारोट, मैदा और घातक केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत खतरनाक हैं। 

    केमिकल वाला दूध और इंडस्ट्रियल रंग 

    सिर्फ पनीर ही नहीं, बल्कि दूध की शुद्धता पर भी बड़े सवालिया निशान हैं। कुछ समय पूर्व फोरलेन स्थित एक होटल के पास ओडिशा से आ रहे दूध के टैंकर को पकड़ा गया था, जिसमें मोटर के जरिए पानी और केमिकल मिलाकर दूध की मात्रा बढ़ाई जा रही थी। 
     
    इसके अलावा, मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए इंडस्ट्रियल रंगों का प्रयोग किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। 

    सिस्टम की सुस्ती: त्योहार बीतने के बाद आती है रिपोर्ट 

    स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि फूड सेफ्टी विभाग की कार्यप्रणाली बेहद लचर है। विभाग त्योहारों के समय औचक निरीक्षण और सैंपल लेने की औपचारिकता तो पूरी करता है, लेकिन लैब से जांच रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। 
     
    तब तक मिलावटी सामान बिक चुका होता है और त्योहार भी खत्म हो जाता है। नियमित जांच के अभाव में मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। 

    हालांकि, विभाग की ओर से पूर्व में कई दुकानों पर जुर्माना लगाया गया और बिना लाइसेंस वाले होटलों को हिदायत दी गई, लेकिन यह कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। विभागीय अधिकारी अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को अपनी सेहत गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    लगातार जांच अभियान चलाया गया है। जिले के कई दुकानों में भी जांच की गई है। पनीर, खोआ व मिठाइयों को लेकर सैंपल लिए गए हैं। ग्राहकों से यह अपील है कि रंगीन मिठाइयों को खरीदने से बचें। क्योंकि दुकानदार रंग का बेधकड़ उपयोग करते हैं। उन्हें मात्रा की जानकारी नहीं है। वैसे सेहत से खिलवाड़ करने की किसी को अधिकार नहीं है। जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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    अदिती सिंह, जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी।