झारखंड में IAS विनय चौबे का निलंबन समाप्त, कार्मिक विभाग में दिया योगदान; 14 माह जेल में रहे, जल्द मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
न्यायालय से जमानत मिलने और कानूनी पेचदगियों से राहत के बाद झारखंड सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे का ...और पढ़ें

आईएएस विनय चौबे का निलंबन न्यायालय से जमानत के बाद समाप्त।
HighLights
उन्होंने झारखंड के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार विभाग में योगदान दिया।
अनुभवी अधिकारी को जल्द ही महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने की संभावना।
राज्य ब्यूरो, रांची। न्यायालय से जमानत मिलने और कानूनी पेचदगियों से राहत के बाद झारखंड सरकार ने 1999 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय चौबे का निलंबन समाप्त कर दिया है।
निलंबन मुक्त होने के साथ ही उन्होंने झारखंड के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में आधिकारिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए योगदान दे दिया है। प्रशासनिक गलियारों में इसे एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ समय से वह कानूनी मामलों के चलते जांच के दायरे में थे।
शराब घोटाला और हजारीबाग में वन विभाग वन भूमि घोटाले से संबंधित मामले में जमानत मिलने के बाद रिहा हुए आइएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे ने गुरुवार को कार्मिक विभाग में योगदान दे दिया है। माना जा रहा है कि अब शीघ्र ही उनकी पोस्टिंग की जाएगी।
निलंबित आइएएस अधिकारी विनय चौबे को पिछले महीने ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। उन्हें सशर्त जमानत दी गई है और कोर्ट ने कहा है कि वे बिना इजाजत देश नहीं छोड़ेंगे।
जांच में पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे। इस दौरान उन्होंने 14 महीने से अधिक जेल में काटा। कार्मिक विभाग ने उनके योगदान को स्वीकार करते हुए इसकी संचिका मुख्य सचिव के पास भेजी है ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके। मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद उन्हें किसी विभाग में पदस्थापित किया जाएगा।
जल्द मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
कार्मिक विभाग में योगदान देने के बाद अब नौकरशाही में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि सरकार उन्हें जल्द ही किसी महत्वपूर्ण और बड़े महकमे की कमान सौंप सकती है। इससे पहले वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के अलावा जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे प्रमुख विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि एक अनुभवी अधिकारी के रूप में उनकी मुख्यधारा में वापसी से कई अटके हुए प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं को गति मिल सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट
भ्रष्टाचार के आरोपों और कानूनी प्रक्रियाओं के लंबे दौर के बाद उनकी यह वापसी राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर विपक्षी दल इस नियुक्ति और उनकी वापसी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
वहीं प्रशासनिक अमले में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार उन्हें किस विभाग की जिम्मेदारी देती है। फिलहाल कार्मिक विभाग में योगदान के बाद उनकी नई पोस्टिंग के आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
