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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jharkhand Assembly Election: शिवराज और CM हिमंत ने बना लिया प्लान, झारखंड में लागू होगा MP और राजस्थान वाला मॉडल

    Updated: Mon, 24 Jun 2024 07:50 PM (GMT+05:30)

    झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के लिए शिवराज सिंह चौहान और हिमंत बिस्वा सरमा ने प्लान बना लिया है। इस बार झारखंड में मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान वाला ...और पढ़ें

    शिवराज और CM हिमंत ने बना लिया प्लान, झारखंड में लागू होगा MP और राजस्थान वाला मॉडल
    शिवराज और CM हिमंत ने बना लिया प्लान, झारखंड में लागू होगा MP और राजस्थान वाला मॉडल

    HighLights

    1. जल्द बीस से अधिक विधानसभा सीटों पर भाजपा करेगी प्रत्याशी की घोषणा
    2. पिछले चुनाव में हारी हुई सीटों पर पहले चरण में प्रत्याशी की घोषणा संभव
    3. चुनाव से पहले प्रत्याशी देने पर तैयारी के लिए मिलता है ज्यादा मौका

    राज्य ब्यूरो, रांची। Jharkhand Assembly Election 2024 झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के लिए भाजपा 20 से अधिक सीटों पर जल्द ही प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है। चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) और सह प्रभारी हिमंत बिस्व सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने रविवार को कोर ग्रुप के साथ बैठक में इस मामले पर चर्चा की थी।

    अब प्रदेश कमेटी को यह जिम्मा दिया गया है कि आदिवासी सुरक्षित सीट और जिन सीटों पर 2019 के विस चुनाव में हार मिली थी, वहां के लिए प्रत्याशियों के नाम का पैनल तैयार कर लिया जाए। इन सीटों पर पैनल में तीन संभावित प्रत्याशियों का नाम तय करना है।

    इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व और भाजपा संसदीय बोर्ड अंतिम नाम पर मुहर लगाएगा। अभी पार्टी ने 22 जुलाई से पहले इन संभावित सीटों पर उम्मीदवार तय कर देने का लक्ष्य रखा है।

    मध्यप्रदेश में भी लागू हो चुका है ये मॉडल

    इससे पहले, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने चुनाव की घोषणा से पहले ही प्रत्याशियों का नाम तय कर दिया था। मध्यप्रदेश में इस मॉडल से पार्टी को भारी सफलता मिली थी।

    तैयारी के लिए ज्यादा समय, असंतोष पर भी लगाम

    प्रत्याशियों का नाम पहले घोषित करने से एक तो चुनाव के लिए प्रत्याशी और पार्टी दोनों को ज्यादा समय मिल जाता है। इसके साथ ही टिकट की घोषणा होने और चुनाव के बीच अधिक समय रहने से स्थानीय स्तर पर असंतोष से निबटना भी आसान होता है।

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    पिछली बार दो को छोड़कर सभी आदिवासी सुरक्षित सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। 2024 के विधानसभा चुनाव में जीत की संभावना तलाश रही पार्टी इन सीटों पर हर हाल में जीत दर्ज करना चाहती है।

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