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    झारखंड में सुबह 4 बजे तक मिलेगी शराब? नई बार नियमावली के ड्राफ्ट पर कारोबारियों ने जताई आपत्ति

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 09:16 PM (IST)

    झारखंड के बार संचालक चाहते हैं कि खुदरा शराब की दुकानें रात 10 बजे तक ही खुलें, ताकि उनके बार का कारोबार प्रभावित न हो। ...और पढ़ें

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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    HighLights

    1. बार संचालक चाहते हैं खुदरा दुकानें रात 10 बजे तक खुलें।

    2. प्रस्तावित उत्पाद नियमावली 2026 पर 40 आपत्तियां दर्ज हुईं।

    3. लाइसेंस शुल्क वृद्धि और वैट पर प्रमुख आपत्तियां उठाई गईं।

    राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के बार संचालक नहीं चाहते हैं कि शराब की खुदरा दुकानें रात के 11 बजे तक खुली रहें। संचालक चाहते हैं कि जिस तरह पूर्व की उत्पाद नीति में रात के 10 बजे तक ही शराब की खुदरा दुकानें खुल रही थीं, उसी तरह इसी अवधि तक ही अब भी खुलें। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य उनके बार के कारोबार का फलना-फूलना है।

    झारखंड में बार संचालन के लिए नई नियमावली प्रस्तावित है, जिसका नाम झारखंड उत्पाद होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब (अनुज्ञापन एवं संचालन) नियमावली, 2026 दिया गया है।

    इस प्रस्तावित नियमावली के ड्राफ्ट को आम हितधारकों के लिए जारी कर इसपर सुझाव मांगा गया था, जिसपर सुझाव के क्रम में बार संचालकों ने शराब की खुदरा दुकानों को खोलने के समय पर भी अपना सुझाव दिया है।

    राज्य में प्रस्तावित बार नियमावली पर बार संचालकों, हितधारकों की कुल 40 आपत्तियां आई हैं। इन आपत्तियों में सर्वाधिक आपत्तियां लाइसेंस शुल्क में बढ़ोत्तरी तथा न्यूनतम राजस्व पर हैं।

    इन सभी आपत्तियों पर इसी माह समीक्षा होनी है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में आयुक्त व झारखंड बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के पद पर पदस्थापन हो चुका है। नियमावली पर समीक्षा के बाद इसे जल्द ही लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रस्तावित नियमावली में सुबह तक शराब परोसने का भी है प्रविधान

    प्रस्तावित बार नियमावली में सुबह चार बजे तक ही बार में शराब परोसने का प्रविधान किया गया है। नियमावली के अनुसार राज्य के पांच सितारा होटल में सुबह के चार बजे तक शराब परोसने की अनुमति दी जा सकती है।

    अब तक बार में रात के 12 बजे तक ही शराब परोसने की अनुमति है। नई नियमावली में जगह के अनुसार बार खोलने के समय को बढ़ाया जा सकता है। समय बढ़ाने के लिए शुल्क भी अलग-अलग निर्धारित किया गया है।

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    प्रस्तावित नियमावली में बार संचालन के लिए जमानत की राशि व लाइसेंस शुल्क में वृद्धि की गई है। इसमें वैट को शामिल करने को एसोसिएशन ने व्यवसाय के हित के विरुद्ध बताया है।

    उनका कहना है कि जब पहले से ही जीएसटी लगा है तो उसपर वैट लगाने से व्यवसायियों को टैक्स की दोहरी मार झेलनी पड़ेगी। इससे शराब की कीमतें बढ़ेंगी और ग्राहक तथा पर्यटन भी प्रभावित होगा।

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