झारखंड सीएम ई-गवर्नेंस फेलो स्कीम: प्राइवेट एजेंसियों की छुट्टी, अब विश्वविद्यालय के छात्र करेंगे योजनाओं का सोशल ऑडिट
झारखंड सरकार 'चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना' शुरू कर रही है, जिसके तहत स्नातकोत्तर छात्र विभिन्न सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन और क्रियान्वयन में त ...और पढ़ें

शुरू होगी चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना, सरकार देगी फेलोशिप। (फोटो: फाइल)
HighLights
स्नातकोत्तर छात्र करेंगे सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन।
'चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना' होगी शुरू।
झारखंड में पीएचडी छात्रों को 70 हजार प्रतिमाह फेलोशिप।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है।
इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई।
प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी।
स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।
किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र
इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है।
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इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।
जिसपर काउंसिल की कार्यकारिणी समिति की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत 70 हजार प्रतिमाह फेलोशिप निर्धारित अवधि तक के लिए दी जाएगी।
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