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    JSSC भाषा विवाद: मंत्री राधाकृष्ण किशोर का अपनी ही पार्टी से सवाल, भोजपुरी-मगही पर कांग्रेस का स्टैंड क्या है?

    Updated: Sun, 10 May 2026 07:01 PM (GMT+05:30)

    झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की पात्रता परीक्षा नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को हटाने पर कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। वित्त मंत्री राधाकृ ...और पढ़ें

    जेएसएससी भाषा विवाद पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण। (फोटो: जागरण फाइल)

    जेएसएससी भाषा विवाद पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण। (फोटो: जागरण फाइल)

    HighLights

    1. मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखा पत्र।

    2. जेएसएससी नियमावली में भोजपुरी, मगही, अंगिका शामिल करने की मांग।

    3. भाषा विवाद पर सरकार ने पांच सदस्यीय समिति बनाई।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की पात्रता परीक्षा नियमावली से भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को नहीं रखने के मुद्दे ने अब कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

    राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को पत्र लिखकर पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग की है।

    मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड के कई जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वाले लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है।

    उन्होंने विशेष रूप से पलामू, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, कोडरमा, गोड्डा, धनबाद और बोकारो का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भोजपुरी और मगही व्यापक रूप से बोली जाती है।

    जबकि संथाल परगना के कुछ हिस्सों में अंगिका का भी प्रभाव है। ऐसे में इन भाषाओं को पात्रता परीक्षा नियमावली से बाहर रखना सामाजिक और भाषाई दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

    पत्र में मंत्री ने यह भी उल्लेख किया है कि हाल ही में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उन्होंने और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इन भाषाओं को नियमावली में शामिल करने की मांग उठाई थी।

    बढ़ते विवाद और विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह, सुदिव्य कुमार सोनू, योगेंद्र प्रसाद और संजय प्रसाद यादव को शामिल किया गया है।

    राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि चूंकि वह और दीपिका पांडेय सिंह कांग्रेस कोटे से सरकार में शामिल मंत्री हैं, इसलिए समिति की बैठक में पार्टी का अधिकृत पक्ष रखना आवश्यक है।

    उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से आग्रह किया है कि कांग्रेस जल्द इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट और आधिकारिक स्टैंड बताए ताकि समिति के समक्ष पार्टी की एकरूप राय रखी जा सके।

    कार्मिक सचिव से पूछे सवाल

    मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य सरकार के कार्मिक सचिव से भी कई अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि झारखंड में भोजपुरी, मगही और अंगिका बोलने वाले लोगों की वास्तविक जनसंख्या कितनी है।

    साथ ही उन्होंने यह भी पूछा है कि वर्ष 2012 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली में इन भाषाओं को शामिल करने का आधार क्या था और आखिर 2025-26 की नियमावली में इन्हें हटाने का आधार क्या माना गया।

    मंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को इन सभी प्रश्नों के जवाब के साथ 17 मई को प्रस्तावित समिति की पहली बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश भी दिया है।

    माना जा रहा है कि इस बैठक में भाषा विवाद को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय या सिफारिश सामने आ सकती है। भाषा विवाद को लेकर राज्य की राजनीति लगातार गरमाई हुई है।

    एक ओर क्षेत्रीय और आदिवासी संगठनों की ओर से स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देने की मांग उठ रही है, वहीं भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषी समुदाय भी इन भाषाओं को परीक्षा नियमावली में शामिल करने के लिए दबाव बना रहे हैं।

    ऐसे में कांग्रेस के भीतर उठे इस सवाल ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।