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फेसबुक पर मुसलमानों को गाली देने के मामले में अभिलाष साहू का निलंबन वापस, OBC मुद्दे पर आंदोलन करेगी झारखंड कांग्रेस

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:06 PM (IST)

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अभिलाष साहू का निलंबन वापस ले लिया है, जिन्हें मुसलमानों पर टिप्पणी के आरोप में ...और पढ़ें

कांग्रेस झारखंड में ओबीसी अधिकारों के लिए आंदोलन की तैयारी में।

कांग्रेस झारखंड में ओबीसी अधिकारों के लिए आंदोलन की तैयारी में।

HighLights

  1. अभिलाष साहू का कांग्रेस से निलंबन रद, पार्टी ने दी राहत।

  2. मुसलमानों पर टिप्पणी के आरोप में निलंबित, माफी के बाद वापसी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व में ओबीसी प्रकोष्ठ में रह चुके अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त कर दिया है। मुसलमानों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

जानकारी के अनुसार उन्होंने संगठन से अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि कि उन्होंने ना तो वीडियो लाइव किया था और ना ही वीडियो में उनकी आवाज है। इस आधार पर उन्हें निलंबन से मुक्ति मिली है।

गौरतलब है कि इसी मामले में निलंबित अमरेंद्र सिंह को अभी राहत नहीं दी गई है। इन दोनों को फेसबुक लाइव पर मुसलमानों को गाली देने के आरोप में पार्टी से निलंबित किया गया था। अमरेंद्र सिंह रांची के दिग्गज कांग्रेसी रहे स्व. पीएन सिंह के पुत्र हैं।

दोनों नेता राजधानी रांची के ओरमांझी में जाम में फंस गए थे और आरोप है कि इसी दौरान उन्होंने फेसबुक लाइव में कहा था कि मुसलमानों को योगी आदित्यनाथ ही ठीक रख सकते हैं। कांग्रेस पार्टी की अनुशासन समिति सोमवार को पत्र जारी कर अभिलाष को निलंबन मुक्त करने से संबंधित सूचना जारी की है जबकि अमरेंद्र सिंह के मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

पार्टी के महासचिव सुनीत शर्मा ने पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी है। पार्टी के सीनियर नेताओं की मानें तो कुछ दिनों में अमरेंद्र सिंह को भी निलंबन मुक्त किया जा सकता है। इसका आधार अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त करने के आधार पर ही बन रहा है।

अभिलाष साहू को निलंबन मुक्त करने को लेकर कांग्रेस का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है की पार्टी जल्द ही पिछड़ा वर्ग को ध्यान में रखते हुए झारखंड में आंदोलन करने का निर्णय ले चुकी है। कांग्रेस का मानना है कि अभिलाष को कार्रवाई के दायरे से मुक्त रखा गया तो वे पार्टी के लिए बेहतर काम कर सकते हैं। 

16 सितंबर को लोकभवन मार्च करेगी कांग्रेस, OBC के लिए अलग कॉलम की मांग

कांग्रेस ने जगनणना में एसटी तथा एससी वर्ग की तरह ओबीसी के लिए भी अलग कालम की मांग की है। इस मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस 16 सितंबर को लोकभवन मार्च करेगी। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की शनिवार को हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।

बैठक में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पूरे देश में देश में जनगणना की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। प्रथम चरण में मकानों की गणना की जा चुकी है तथा अब दूसरे चरण में व्यक्तियों की गणना की जानी है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि जनगणना के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग की जातिगत पहचान और उनकी वास्तविक जनसंख्या का स्पष्ट एवं वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाए।

राज्य में पिछड़े वर्गों की आबादी बड़ी संख्या में है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े इस वर्ग को आज भी उनकी जनसंख्या के अनुरूप अधिकार और हिस्सेदारी का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशों के आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया गया है, लेकिन झारखंड में पिछड़े वर्गों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है।

राज्य के सात जिलों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण शून्य है। उन्होंने कहा कि इसी मांग को लेकर कांग्रेस 16 सितंबर को ओबीसी मोर्चा बापू वाटिका से राजभवन तक मार्च निकालेगी तथा राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगी।

वहीं, एमएमडीआर कानून एवं खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों तथा चंदा चोरी के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी 26 सितंबर को शहीद चौक से लोकभवन तक मार्च करेगी और ज्ञापन सौंपेगी। इसके बाद पांच अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक सभी प्रखंड मुख्यालयों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

पिछड़े वर्गों को जनसंख्या के अनुरूप हिस्सेदारी सुनिश्चित हो: निशांत जायसवाल

कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि इस बार जनगणना में जाति दर्ज करने के लिए पूर्व निर्धारित ड्रापडाउन सूची अथवा अलग से ओबीसी का विशेष कॉलम उपलब्ध नहीं कराया गया है, व्यक्ति द्वारा स्वयं घोषित जाति दर्ज करने के लिए एक खुला कालम रखा गया है।

उन्होंने कहा कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना के जातिगत आंकड़े अन्य परिणामों के साथ सार्वजनिक नहीं किए गए। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल हलफनामों में भी इन आंकड़ों में तकनीकी समस्याओं और विसंगतियों का उल्लेख किया गया था। केंद्र सरकार ने इन आंकड़ों को त्रुटिपूर्ण और उपयोग के योग्य नहीं होने की बात कही थी।

ऐसी स्थिति में आशंका है कि यदि आगामी जनगणना में उचित व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में भी इसी प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ओबीसी मोर्चा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुरूप सामाजिक, राजनीतिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करना सामाजिक न्याय की दिशा में आवश्यक कदम है।