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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Jharkhand Chunav: महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर हलचल तेज, इस पार्टी ने रखी बड़ी डिमांड; क्या करेंगे हेमंत?

    Updated: Mon, 23 Sep 2024 03:48 PM (IST)

    झारखंड विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर भाकपा माले तनाव बढ़ाने जा रही है। पार्टी की 24 और 25 सितंबर को होने वाली बैठक में सीटों की ...और पढ़ें

    विधानसभा चुनाव में सीटों की दावेदारी को लेकर कल होगा निर्णय। (फाइल फोटो)
    विधानसभा चुनाव में सीटों की दावेदारी को लेकर कल होगा निर्णय। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने साथ चुनाव लड़ने का दिए संकेत
    2. भाजपा के विरुद्ध एकजुट होकर चुनाव लड़ने का किया है आह्वान
    3. मासस के विलय के बाद भाकपा माले का मनोबल ऊंचा
    4. निरसा, सिंदरी, बगोदर व राजधनवार पर समझौते के मूड में नहीं माले

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार महागठबंधन में सीट बंटवारे पर भाकपा माले तनाव बढ़ाएगा। सीटों की दावेदारी पर माले की 24 व 25 सितंबर को होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

    पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है। उन्होंने भाजपा के विरुद्ध एकजुट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया है।

    मासस के विलय के बाद भाकपा माले का मनोबल ऊंचा है। धनबाद में दोनों ही दलों ने नौ सितंबर को एकता रैली के माध्यम से अपना शक्ति परिचय भी दिया था। पार्टी विधानसभा चुनाव के मूड में आ चुकी है। पार्टी से जुड़े प्रमुख नेताओं का झारखंड में आना-जाना लगा हुआ है।

    उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के लिए दावेदारी

    पिछले दिनों पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल से चुनाव लड़ने की दावेदारी करने पर विचार करने की बात कही थी।

    उन्होंने तर्क दिया था कि उत्तरी छाेटानागपुर प्रमंडल में महागठबंधन कमजोर स्थिति में है। महागठबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से ही वे इस प्रमंडल के विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर सकते हैं।

    महागठबंधन में बढ़ेगी टेंशन 

    सीटों के बंटवारे पर महागठबंधन के प्रमुख घटक दल झामुमो, कांग्रेस व राजद भी अपनी-अपनी दावेदारी प्रस्तुत करेंगे। इससे सीट बंटवारे की राह तनाव बढ़ाने वाला है, लेकिन राह आसान नहीं दिख रही है।

    इन सीटों पर समझौते के मूड में नहीं माले

    मासस के विलय के बाद भाकपा माले राज्य की निरसा, सिंदरी, बगोदर व राजधनवार विधानसभा सीट पर किसी भी हाल में समझौते के मूड में नहीं है।

    निरसा पूर्व विधायक सह मासस नेता अरुप चटर्जी का क्षेत्र है। वे यहां से वर्ष 2009 व 2014 में विधायक चुने गए थे।

    बगोदर में माले से विधायक रहे विनोद कुमार सिंह मजबूत स्थिति में हैं। वे यहां से 2005, 2009 व 2019 में विधायक चुने जा चुके हैं।

    इसी प्रकार, राजधनवार से भाकपा माले से राजकुमार यादव वर्ष 2014 में विधायक चुने गए थे। विलय के बाद दोनों ही दल अपनी पकड़ वाले क्षेत्र में समझौते के मूड में नहीं हैं। वे कई अन्य सीटों पर भी चुनाव लड़ने की दावेदारी करेंगे।

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