चीन में भारी डिमांड, और दांव पर लगी झारखंड के भालू-बंदरों की जान; टूटेगा तस्करों का नेटवर्क
वन एवं पर्यावरण विभाग ने झारखंड में वन्यजीवों और उनके अंगों की तस्करी रोकने के लिए एक विशेष टीम गठित की है। यौन क्षमता वृद्धि जैसे अंधविश्वासों के कार ...और पढ़ें

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की विशेष टीम गठित। (विजुअल: एआई जेनरेटेड)
HighLights
भालू के अंग, तितली और बंदरों की तस्करी पर रोक।
तस्करों और खरीद-बिक्री करने वालों पर होगी कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य के जंगलों से वन्यजीवों और उनके अंगों की तस्करी की सूचना मिलती रहती है। कुछ दिनों पूर्व गुमला-सिमडेगा क्षेत्र में भालू की हत्या करने की जानकारी भी मिल रही थी। तस्कर भालू के बाइल (पित्त) निकालने के लिए उनकी हत्या कर रहे थे।
इस संबंध में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई। यौन क्षमता वृद्धि और कई असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए इन वन्यजीवों के अंगों के प्रयोग का अंधविश्वास इस तरह की तस्करी का मुख्य कारण है।
अब वन एवं पर्यावरण विभाग ने इसपर रोक लगाने के लिए वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की विशेष टीम गठित कर उसे सक्रिय किया है।
राज्य के जंगलों से तितली, कछुआ और बंदरों की तस्करी की जानकारी भी मिलती रही है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तस्करों के साथ इनकी खरीद-बिक्री करने वालों को भी पकड़ने की मुहिम चलाई गई है।
ग्रामीणों को भी क्षेत्र में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि की सूचना वनकर्मियों को देने की सलाह दी गई है।
वन्यजीवों को मिला का कानूनी संरक्षण
देश में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू है। इस अधिनियम में जंगलों में रहनेवाले मूक पशुओं के शिकार या तस्करी को दंडनीय अपराध माना गया है।
वन्यजीवों की श्रेणी में तितली, बड़े आकार की छिपकली को भी शामिल किया गया है। पूर्व में झारखंड में पकड़े गए तस्करों ने बताया है कि इस अवैध कारोबार में अंतर्राष्ट्रीय गिरोह की भी संलिप्तता है।
बंदरों और भालू के शरीर के अंगों की चीन में भारी मांग रहती है। वहां इसका प्रयोग दवाई बनाने में किया जाता है। हालांकि हाल के दिनों में हुई सख्ती के बाद बंदरों की तस्करी में कमी आई है।
हाथी दांत की तस्करी पर लगी रोक
राज्य में कई बार हाथियों को उनके दांत के लिए हत्या करने के मामले सामने आए हैं। लेकिन सीमित संसाधन के बाद भी वन विभाग ने इसपर प्रभावी नियंत्रण किया है।
पर्यावरणविद नीतिश प्रियदर्शी ने बताया कि तस्करी की वजह से कई तरह की प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट आ गया है।
उन्होंने तस्करी की वजह से होने वाले वन्यजीव हत्या को पारिस्थितिकी संतुलन के लिए भी खतरा बताया।