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झारखंड में हर मोर्चे पर सरकारी कामकाज की रफ्तार रुकी, बड़े अफसर स्वयं बढ़ा रहे आवश्यक फाइलें

Updated: Fri, 21 Aug 2026 09:52 AM (IST)

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द होने से झारखंड के सरकारी कार्यालयों में कामकाज ठप हो गया है। कर्मचारियों की कमी के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, वरिष्ठ अधिकारी आवश्यक कार्य स्वयं कर रहे हैं।

सरकारी कामकाज ठप, जेएसएससी सीजीएल रद होने से संकट।

सरकारी कामकाज ठप, जेएसएससी सीजीएल रद होने से संकट।

HighLights

  1. जेएसएससी सीजीएल रद्द, सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित।

  2. कर्मचारियों की कमी से फाइलें अटकीं, वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय।

  3. जेपीएससी अधिकारियों को कोर्ट के फैसले से मिली राहत।

राज्य ब्यूरो, रांची। जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा रद किए जाने से सरकारी कार्यालयों में हर मोर्चे पर कामकाज रुक गया है। बड़ा कारण यह है कि फाइल आगे बढ़ानेवाले कर्मी ही कार्यरत नहीं हैं। इन कर्मियों के पास जो फाइलें थीं, वे किसी अन्य को प्रभार में भी नहीं दिया गया है। इससे कामकाज आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो गया है।

वहीं, अत्यावश्यक होने पर वरीय पदाधिकारी स्वयं फाइलों को बढ़ा रहे हैं। प्रभार विभाग के किसी अन्य कर्मी को नहीं दिया जा सका है। सीजीएल परीक्षा के माध्यम से 847 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी, 288 कनीय सचिवालय सहायक, 170 श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, 191 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, 249 प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, 178 अंचल निरीक्षक तथा चार प्लानिंग असिस्टेंट नियुक्त हुए थे।

इनमें सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और कनीय सचिवालय सहायक के 1,135 कर्मी सचिवालय में पदस्थापित थे। यही पदाधिकारी संचिका तैयार कर आगे बढ़ाते हैं। राज्य में फाइलों का जहां से सृजन होता है और सीनियर अधिकारियों के लिए आगे बढ़ाया जाता है, उन जगहों पर कर्मियों के नहीं होने से पूरा काम काज रुक गया है।

सचिवालय में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी फाइलों को आगे बढ़ाते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी अभी कार्यरत नहीं हैं। ऐसे में फाइलें आगे बढ़ने में कठिनाई आ रही है। इन अधिकारियों ने अपना प्रभार भी किसी को नहीं दिया है।

प्रभार लेन-देन की प्रक्रिया में चार-पांच दिन आराम से लग जाते हैं। ऐसे में यह तत्काल संभव भी नहीं है। एक पदाधिकारी ने बताया कि आवश्यक कार्यों के लिए सीनियर अफसर स्वयं संचिकाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

कोर्ट का फैसला आते ही पोस्टिंग की जगह पर लौटने लगे अधिकारी

झारखंड हाई कोर्ट ने जैसे ही 11 वीं से 13वीं जेपीएससी के सफल अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्मिक की कार्रवाई पर रोक लगाई वैसे ही तमाम उप समाहर्ता स्तर के अधिकारी अपनी-अपनी पोस्टिंग की जगह पर पहुंच गए।

इन अधिकारियों ने योगदान भी दे दिया और इसकी सूचना जिले के वरीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक को भेज दिया। सभी को इस बात का भय था कि कहीं विभाग अवकाश का आवेदन नहीं होने पर कार्रवाई ना कर दे।

हालांकि अभी योगदान स्वीकार करने को लेकर भ्रम बना हुआ है। जिन अधिकारियों को एक बार पद से मुक्त करने का आदेश जारी हुआ है उन्हें वापस काम पर आने के लिए भी आदेश की आवश्यकता होगी।

ज्ञात हो कि 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा रद होने से 207 उप समाहर्ता, 35 पुलिस उपाधीक्षक, 56 राज्य कर पदाधिकारी, 02 कारा अधीक्षक, 10 शिक्षा सेवा (कैटेगरी-2), एक जिला समादेष्टा, आठ सहायक निबंधक, 14 श्रम अधीक्षक, छह प्रोबेशन पदाधिकारी, तीन उत्पाद निरीक्षक की नौकरी संकट में आ गई थी। इनमें कई उपसमाहर्ता एटीआइ में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद विभिन्न प्रखंडों और अंचलों में फिल्ड ट्रेनिंग के तहत पदस्थापित थे।