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झारखंड HC ने कहा- बिहार का शराबबंदी कानून झारखंड में नहीं होगा लागू, जब्त वाहन सशर्त छोड़ने का निर्देश

Published: Tue, 22 Sep 2026 07:48 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 झारखंड में लागू नहीं होता। अदालत ...और पढ़ें

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को माना त्रुटिपूर्ण।

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को माना त्रुटिपूर्ण।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने अवैध शराब परिवहन के एक मामले में जब्त कमर्शियल पिक-अप वैन की रिहाई पर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2000 में बिहार पुनर्गठन अधिनियम के बाद बना बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 केवल बिहार राज्य के लिए है और यह झारखंड में लागू नहीं होता।

हाई कोर्ट ने बोकारो न्यायिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया कि वे उपायुक्त से रिपोर्ट तलब करें कि क्या वाहन के संबंध में कोई औपचारिक जब्तीकरण कार्यवाही शुरू की गई है। यदि कोई ऐसी कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, तो अदालत इन शर्तों पर वाहन को प्रार्थी रितेश प्रधान के पक्ष में रिलीज करे। याचिकाकर्ता को नौ लाख रुपये का बंधपत्र और दो जमानतदार देने होंगे।

अदालत द्वारा मांगे जाने पर वाहन पेश करने होगा। मामले के लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ता वाहन को न तो बेच सकेगा, न बंधक रखेगा और न ही इसका मालिकाना हक किसी अन्य को हस्तांतरित करेगा। वाहन के रंग-रूप या पहचान में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जाएगा।

निचली अदालत के खिलाफ प्रार्थी ने रितेश प्रधान की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक व्यावसायिक पिकअप वैन को अवैध शराब ले जाने के आरोप में जब्त किया था।

वाहन से 145 कार्टन में रखी 1,740 व्हिस्की की बोतलें बरामद की गई थीं। वाहन मालिक रितेश प्रधान ने वाहन रिलीज के लिए न्यायिक दंडाधिकारी, बोकारो की अदालत में आवेदन दाखिल की थी। पुलिस ने अदालत को बताया कि वाहन के जब्तीकरण की प्रक्रिया के लिए उपायुक्त को अनुशंसा भेजी गई है।

इसके आधार पर 27 मई 2026 को मजिस्ट्रेट ने वाहन छोड़ने की याचिका खारिज कर दी। मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सत्र न्यायाधीश, बोकारो की अदालत में याचिका दायर की।

सत्र न्यायालय ने 27 जून 2026 को याचिका खारिज करते हुए कहा कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के प्रविधानों के तहत अवैध शराब परिवहन में इस्तेमाल वाहन को जब्त करने का नियम है और जब्ती के बाद आपराधिक अदालत का क्षेत्राधिकार समाप्त हो जाता है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।

याचिकाकर्ता के वकील गिरीश मोहन सिंह ने दलील दी कि वाहन फाइनेंस पर लिया गया है और खुले आसमान के नीचे पड़े रहने से खराब हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा अब तक कोई वास्तविक जब्तीकरण कार्यवाही शुरू नहीं की गई है।

हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि सत्र न्यायाधीश ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 पर भरोसा करके गंभीर कानूनी भूल की है।

अदालत ने कहा कि बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 बिहार का राज्य कानून है जो केवल बिहार में लागू होता है। चूंकि यह कानून बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के बाद बना है, इसलिए यह किसी भी सूरत में झारखंड राज्य में लागू नहीं हो सकता।