झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: नौ अपर समाहर्ताओं की प्रोन्नति पर पुनर्विचार करे राज्य सरकार
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नौ अपर समाहर्ताओं को संयुक्त सचिव पद पर प्रोन्नति के मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
अदालत ने प्रशासनिक त्रुटियों से मौलिक अधिकारों के हनन को माना।
कनिष्ठों को प्रोन्नति मिलने के बाद वरिष्ठों का मामला सीलबंद लिफाफे में।
क्या है पूरा विवाद?
ये नौ अधिकारी झारखंड सिविल सेवा परीक्षा 2006 बैच के माध्यम से नियुक्त हुए थे। मामला तब उलझा जब दिसंबर 2023 की विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) में सरकार ने मात्र 14 रिक्तियां दिखाईं, जबकि प्रार्थियों के अनुसार 30 से अधिक पद खाली थे।
अदालत ने कहा कि यदि 2023 में ही रिक्तियों का सही आकलन कर डीपीसी की बैठक होती, तो इन अधिकारियों को सीबीआइ चार्जशीट दाखिल होने से पहले ही प्रोन्नति मिल जाती।
सीबीआइ ने 20 अप्रैल 2024 को चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मार्च 2025 की डीपीसी में इन अधिकारियों का मामला सीलबंद लिफाफे में डाल दिया गया, जबकि उनके कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारियों को प्रोन्नति दे दी गई।
अदालत का कड़ा रुख
हाई कोर्ट के इस निर्णय से राज्य के उन अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है जो लंबे समय से प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे और तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से उनके पदोन्नति के अधिकार को रोका गया था।