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    देवघर AIIMS में सुविधाओं पर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब; निशिकांत दुबे की याचिका पर फैसला

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 11:48 AM (GMT+05:30)

    झारखंड हाई कोर्ट ने देवघर एम्स में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सुनवाई की। कोर्ट ने एम्स प्रशासन और राज्य सरकार से पिछले एक साल की वार्डवार विस्तृत रिपोर ...और पढ़ें

    देवघर एम्स में सुविधाओं पर हाई कोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब।

    देवघर एम्स में सुविधाओं पर हाई कोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब।

    HighLights

    1. मरीजों के इलाज, सुविधाओं पर भी कोर्ट का सवाल।

    2. राज्य सरकार से सेंट्रल स्कूल जमीन पर जवाब तलब।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में देवघर एम्स में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।

    सुनवाई के बाद अदालत ने देवघर एम्स और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष पिछले एक वर्ष की वार्डवार विस्तृत रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करें।

    कोर्ट ने यह भी पूछा है कि एम्स में कितने मरीज इलाज के लिए आते हैं, उनका इलाज किस प्रकार किया जाता है और उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।

    मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान एम्स प्रबंधन की ओर से पूर्व आदेश के आलोक में जवाब दाखिल किया गया।

    इसमें बताया गया कि फिलहाल देवघर एम्स में बर्न पेशेंट के इलाज के लिए चार बेड आवंटित किए गए हैं और उन पर उपचार जारी है। यह भी जानकारी दी गई कि सेंट्रल स्कूल के लिए अभी तक जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है।

    राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सेंट्रल स्कूल के लिए जमीन शीघ्र उपलब्ध करा दी जाएगी। फिलहाल स्कूल संचालन के लिए वैकल्पिक स्थान दे दिया गया है और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी।

    अदालत ने याचिकाकर्ता सांसद डॉ निशिकांत दुबे को राज्य सरकार और एम्स द्वारा दाखिल जवाब पर प्रति उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया है।

    याचिका का लंबा इतिहास और सांसद की भूमिका  

    यह PIL (जनहित याचिका) सांसद डॉ. निशिकांत दुबे द्वारा 2022 से चली आ रही है। उन्होंने देवघर AIIMS को पूर्ण रूप से चालू करने के लिए पानी, बिजली, अप्रोच रोड, 20 एकड़ अतिरिक्त जमीन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर याचिका दायर की थी।

    दुबे ने लोकसभा में भी कई बार देवघर AIIMS की स्थापना की मांग की थी (2015-2017 के दौरान Rule 377 में चर्चा)। यह याचिका अब कोर्ट की स्वत: संज्ञान वाली PIL में भी जुड़ गई है, जिससे मामला और मजबूत हो गया है।

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    AIIMS देवघर की वर्तमान स्थिति

    •    AIIMS देवघर 2019 में शुरू हुआ, पहला बैच MBBS का 50 छात्रों का था।  
    •    अब OPD में रोजाना 1200+ मरीज इलाज करा रहे हैं (कुछ रिपोर्ट्स में 3000 तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है)।  
    •   750 बेड्स का टारगेट है, जिसमें IPD (इन-पेशेंट डिपार्टमेंट) 2022 में 250 बेड्स के साथ शुरू हुआ। 
    • बर्न वार्ड जैसी स्पेशलाइज्ड सुविधाएं अभी सीमित हैं—कोर्ट में बताया गया कि सिर्फ 4 बेड्स बर्न पेशेंट्स के लिए आवंटित हैं।  
    •    सेंट्रल स्कूल के लिए जमीन अभी तक नहीं मिली, हालांकि राज्य सरकार ने वैकल्पिक जगह और जल्द उपलब्ध कराने का वादा किया है।

    कोर्ट की सख्ती और अगली तारीख  

    हाईकोर्ट ने वार्ड-वार पिछले 1 साल की विस्तृत रिपोर्ट (शपथ-पत्र के साथ) मांगी है—मरीजों की संख्या, इलाज का तरीका, उपलब्ध सुविधाओं की वास्तविक स्थिति।

    यह निर्देश दिखाता है कि कोर्ट अब सिर्फ वादों पर नहीं, बल्कि ग्राउंड रियलिटी पर फोकस कर रहा है। अगली सुनवाई 28 फरवरी को है, जहां याचिकाकर्ता (निशिकांत दुबे) को भी जवाब पर काउंटर दाखिल करने का मौका मिलेगा।

    झारखंड में हेल्थ का बड़ा हब होगा

    देवघर AIIMS झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र के लिए बड़ा स्वास्थ्य हब बन सकता है, खासकर बाबा बैद्यनाथ धाम के कारण आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और लोकल लोगों के लिए।

    लेकिन सुविधाओं की कमी से मरीजों को रांची या अन्य शहरों की AIIMS/हॉस्पिटल्स पर निर्भर रहना पड़ता है। यह खबर स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर में राज्य-केंद्र समन्वय की कमी को उजागर करती है।