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    झारखंड में ऐसे कई सचिव, जो चला रहे प्राइवेट अस्पताल; विधानसभा में हेल्थ इश्यू पर तीखी बहस

    Updated: Thu, 12 Mar 2026 10:21 AM (IST)

    झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर गहन चर्चा हुई। विधायक जयराम महतो ने इंग्लैंड-जर्मनी जैसी सुविधाओं और अधिकारियों द्वारा निजी ...और पढ़ें

    झारखंड स्वास्थ्य व्यवस्था पर विधानसभा में गरमागरम बहस, निजी अस्पतालों पर उठे सवाल। (फोटो :जागरण)

    झारखंड स्वास्थ्य व्यवस्था पर विधानसभा में गरमागरम बहस, निजी अस्पतालों पर उठे सवाल। (फोटो :जागरण)

    HighLights

    1. जयराम महतो ने अधिकारियों के निजी अस्पताल चलाने पर सवाल उठाए।

    2. राज्य में डॉक्टरों और नर्सों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त की गई।

    3. विधायकों ने एम्बुलेंस सेवा और रिम्स-2 के स्थान पर सुधार की मांग की।

    राज्य ब्यूरो, रांची। विधानसभा में बजट सत्र के दौरान स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की मांगों को लेकर तैयार अनुपूरक बजट पर विधायक जयराम महतो ने कटौती प्रस्ताव रखते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को इंग्लैंड, जर्मनी, स्वीडन व अन्य यूरोपीय राष्ट्रों की तर्ज पर झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि मंत्री को इन राष्ट्रों का भ्रमण कर देखना चाहिए कि आखिर कैसे स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त हो सकती है। वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था आम लोगों से काफी दूर है। राज्य सरकार जहां आठ हजार करोड़ रुपये के बजट पर सीमित है तो निजी अस्पतालों का बजट 12 हजार करोड़ का है।

    हमसे बड़ा कारोबार प्राइवेट केयर मार्केट का है। एक आइएएस अधिकारी के अस्पताल चलाने की सूचना सभी के पास है। लेकिन राज्य में कई ऐसे सचिव हैं, जो निजी भवन में अस्पताल चला रहे हैं। राज्य में हर दिन 10 से 12 युवाओं की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो रही है।

    महतो ने राज्य में एनुअल हेल्थ चेकअप कानून बनाने की भी मांग की। कहा कि लोगों को बीमारियों का पता तब चलता है जब बीमारी गंभीर हो जाती है। नियमित जांच हो तो यह संकट नहीं रहेगा।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा जहां एक हजार की आबादी पर एक डाक्टर होना चाहिए वहीं झारखंड में 75 सौ की आबादी पर एक डाक्टर है। राज्य में 22,500 डाक्टरों की आवश्यकता है जबकि राज्य में अभी केवल 805 मेडिकल की सीटें है।

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    नर्स की तीन हजार से अधिक सीटें खाली हैं। स्वास्थ्य सेवा पर कुल जीडीपी का केवल एक प्रतिशत खर्च हो रहा है। प्रत्येक प्रमंडल में नए रिम्स बनाने की आवश्यकता है।

    अबुआ दवाखाना से लोगों को मिलेगी राहत : हेमलाल

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हेमलाल मुर्मु ने अनुपूरक बजट को लेकर मांग का समर्थन करते हुए कहा कि अबुआ दवाखाना से राज्य के गरीब लोगों को बड़े पैमाने पर राहत मिलेगी। बजट में राज्य सरकार ने कैंसर के इलाज के लिए बड़ी घोषणाएं की है, जो सराहनीय है। उन्होंने रिम्स-2 की आवश्यकता पर जोर दिया और यह भी मांग रखी कि हर जिले में ओल्ड एज होम की सुविधा हो। उन्होंने राज्य में एम्बुलेंस सुविधा को बेहतर बनाने पर जोर दिया। प्राइवेट अस्पतालों के लिए रेगुलेटरी कमेटी बनाने की मांग की ताकि उनपर नियंत्रण
    रखा जा सके।

    अरूप ने 108 का मुद्दा उठाया, लुइस ने मांग को जायज करार दिया

    चर्चा के दौरान विधायक लुइस मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग और खाद्य आपूर्ति विभाग की मांग को जायज करार देते हुए कहा कि सुविधाओं को बढ़ाने के लिए सरकार को पैसे की आवश्यकता होगी। इधर, विधायक अरूप चटर्जी ने 108 एंबुलेंस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर कोई फोन करने पर नहीं आता है तो आखिर आम आदमी शिकायत कहां करे। सरकार को इसकी व्यवस्था करनी चाहिए।

    अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ना कतई गलत नहीं : मरांडी

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रिम्स -2 को कहीं और ले जाने की वकालत करते हुए स्थानीय लोगों के आक्रामक रुख का समर्थन किया। कहा कि अगर अपनी जमीन बचाने के लिए लड़ाई भी लड़नी पड़े तो कोई गलत बात नहीं है।

    उन्होंने कहा कि लोग इलाज के लिए नई दिल्ली और वेल्लौर जा रहे हैं तो 10-20 किमी दूर जाने में कोई गलत बात नहीं है। रिम्स-2 को कहीं और बनाने की वकालत उन्होंने की। इस क्रम में उन्होंने कहा कि सरकार जो मांग लेकर आई है, उसकी कोई जरूरत ही नहीं है।

    डाक्टरों की बड़े पैमाने पर कमी है तो आवश्यकता से 43 प्रतिशत नर्स कम है। इसके पूर्व उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट की कई बातों को 2026-27 में शामिल किया गया है। 2025-26 में खूंटी, धनबाद, जामताड़ा जैसे जिलों में चिकित्सा महाविद्यालय बनाने की बात थी। इस वर्ष भी यही प्रविधान रखा गया है। केवल एक दो जिलों को इधर उधर उधर कर दिया।

    एयर एंबुलेंस की स्थिति किसी से छिपी नहीं

    बाबूलाल ने कहा, एयर एंबुलेंस की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। 2023 में राज्य सरकार ने इस सुविधा को शुरू की। पिछले दिनों एक बच्चे के शव के लिए एम्बुलेंस सुविधा नहीं मिलने से परिजन को डिब्बे में ले जाना पड़ा। सरकार को ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

    खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के बजट की बात करते हुए बाबू लाल मरांडी ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य में 11 लाख से अधिक लाभुकों को धोती साड़ी योजना का लाभ नहीं मिला। आठ माह से लाभुकों को दाल एवं नमक और पिछले कई माह से चीनी तक नहीं मिला है।