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    एसिड अटैक और दिव्यांगों के मामलों की सुनवाई को लेकर नई गाइडलाइन जारी, झारखंड हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला

    Updated: Sat, 02 May 2026 06:34 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने एसिड अटैक और दिव्यांगों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    HighLights

    1. एसिड अटैक मामलों का छह माह में निपटारा अनिवार्य।

    2. दिव्यांगों से जुड़े मामलों में भी त्वरित न्याय।

    3. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर आधारित नई गाइडलाइन।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने एसिड अटैक और दिव्यांगों से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत ऐसे सभी लंबित मामलों का निपटारा अब छह महीने के भीतर करना अनिवार्य होगा।

    इसे लेकर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल सत्य प्रकाश सिन्हा द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, राज्य में एसिड अटैक से संबंधित सभी लंबित मामलों के निपटारे के लिए अब अधिकतम छह महीने की समय-सीमा तय की गई है।

    यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के शाहीन मलिक बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में दिए गए निर्देशों के आलोक में लिया गया है।
    रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि एसिड अटैक जैसे गंभीर अपराधों में पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इसके साथ ही दिव्यांगों से जुड़े मामलों के निष्पादन में भी विशेष संवेदनशीलता और तत्परता बरतने का निर्देश दिया गया है। कहा गया है कि इस पहल का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं और अन्य प्रभावित व्यक्तियों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन की ओर पुनः अग्रसर हो सकें।

    हाई कोर्ट ने सभी अधीनस्थ न्यायालयों को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

    प्राथमिकता के आधार पर होगी सुनवाई

    हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिव्यांग वादियों और अधिवक्ताओं से संबंधित मामले और एसिड अटैक पीड़ितों से जुड़े मामलों को अब अदालतों में प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाएगा। अब इन मामलों की सुनवाई के लिए लंबी तिथियों का इंतजार नहीं करना होगा।

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    निर्देशों का सख्ती से पालन

    सर्कुलर की प्रति महाधिवक्ता, झारखंड राज्य बार काउंसिल के अध्यक्ष और कोर्ट के सभी रजिस्ट्रार को भेज दी गई है। साथ ही इसे हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

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