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    झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ईडी अधिकारियों पर लगे आरोपों की जांच अब सीबीआई करेगी

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 06:42 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मारपीट के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हु ...और पढ़ें

    ईडी अधिकारियों पर मारपीट मामले की जांच सीबीआई करेगी।

    ईडी अधिकारियों पर मारपीट मामले की जांच सीबीआई करेगी।

    HighLights

    1. ईडी की संवेदनशील जांच को बाधित करने का प्रयास।

    2. हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) को सौंपने का आदेश दिया है।

    जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने यह आदेश ईडी अधिकारियों की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन पर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए या तो प्राथमिकी निरस्त करने या फिर जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई थी।

    रांची जोनल कार्यालय के अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान एक आरोपित से मारपीट के मामले में एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने 24 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि जिस व्यक्ति के आरोप पर प्राथमिकी दर्ज की गई है, उसके खिलाफ पहले से ही दो आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह ईडी की जांच के दायरे में है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला इस बात का संकेत देता है कि ईडी द्वारा की जा रही हाई-प्रोफाइल जांच से प्रभावित कुछ लोगों की मिलीभगत से यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

    अदालत ने झारखंड पुलिस की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 15 जनवरी की सुबह ईडी कार्यालय पर कार्रवाई संदिग्ध है और यह बिना वरिष्ठ अधिकारियों के इशारे पर नहीं की जा सकती है।

    अदालत ने कहा कि आरोप केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों पर लगाए गए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ऐसे में स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना ही उचित होगा। अदालत ने इसे असाधारण परिस्थिति मानते हुए मामला सीबीआइ को सौंपने का निर्देश दिया।

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    अदालत ने एयरपोर्ट थाना प्रभारी को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल सीबीआइ को सौंपने का निर्देश दिया। सीबीआइ के अधिवक्ता को आदेश की जानकारी सीबीआइ निदेशक को देने का भी कहा।

    बिना समन के ईडी कार्यालय पहुंचा था संतोष 

    सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एएसजीआइ एसवी राजू, जोहेब हुसैन, एके दास और सौरव कुमार ने अदालत को बताया था कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से जुड़े लगभग 23 करोड़ रुपये के गबन के आरोपित संतोष कुमार 12 जनवरी को बिना किसी समन के स्वयं ईडी कार्यालय पहुंच गया था।

    पूछताछ के दौरान वह अचानक उग्र हो गया और पानी का जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उसे हल्की चोट आई। इसके बाद ईडी अधिकारियों ने उसे तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा। बाद में संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर मारपीट और अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी।

    प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रांची पुलिस की एक टीम जांच के लिए ईडी के रांची स्थित जोनल कार्यालय पहुंच गई और वहां दस्तावेजों की छानबीन करने लगी। इसके खिलाफ ईडी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की थी।

    राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि संतोष कुमार को पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय बुलाया गया था। पूछताछ के दौरान उस पर दबाव बनाया गया और उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसे चोट लगी। इसी आधार पर उसने संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी और उसी की जांच के लिए पुलिस टीम ईडी कार्यालय पहुंची थी।

    इस मामले में पूर्व की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ईडी के रांची जोनल कार्यालय के दो अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी पर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही केंद्र सरकार के गृह सचिव को ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ, बीएसएफ या अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

    तो सीधी जिम्मेदारी रांची के एसएसपी की होगी

    अदालत ने यह भी कहा था कि यदि ईडी कार्यालय में कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी सीधी जिम्मेदारी रांची के एसएसपी की होगी।
    कोर्ट ने ईडी कार्यालय परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया था।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सामान्य परिस्थितियों में प्राथमिकी के शुरुआती चरण में अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, लेकिन इस मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत मूक दर्शक नहीं बन सकती।

    अदालत ने यह भी कहा था कि प्रथम दृष्टया यह ईडी द्वारा की जा रही संवेदनशील जांच को बाधित करने का प्रयास भी हो सकता है। अदालत ने उल्लेख किया कि मनी लांड्रिंग अधिनियम की धारा 67 के तहत यदि ईडी अधिकारी सद्भावना में अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो उन्हें विधिक संरक्षण प्राप्त है।