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'सहमति से बना संबंध दुष्कर्म नहीं..', शादी से इनकार पर दर्ज केस में झारखंड हाईकोर्ट की टिप्पणी

Published: Thu, 03 Sep 2026 06:25 PM (IST)

रांची हाई कोर्ट ने शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के दुष्कर्म मामले को रद्द किया है। अदालत ने ...और पढ़ें

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने दुष्कर्म का मामला किया निरस्त।

  2. सात साल तक सहमति से चला शारीरिक संबंध।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने शादी का वादा कर सात साल तक शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में दर्ज दुष्कर्म का मामला निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों से दोनों के बीच सहमति से संबंध होने की बात सामने आती है।

अदालत ने आरोपित लालू महथा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और कोर्ट के संज्ञान आदेश सहित पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। मामला गिरिडीह महिला (सदर) थाना से जुड़ा है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

इसके आधार पर गिरिडीह के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 16 अगस्त 2024 को मामले में संज्ञान लिया था। इसके खिलाफ आरोपित ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

शादी समारोह में हुई थी मुलाकात

शिकायत के अनुसार, आरोपित और महिला की मुलाकात 2016 में एक शादी समारोह में हुई थी। दोनों ने मोबाइल नंबर का आदान-प्रदान किया और बाद में उनके बीच प्रेम संबंध हो गया। महिला का आरोप था कि आरोपित ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। यह संबंध करीब सात साल तक चला। शादी के लिए दबाव बनाने पर आरोपित उसे टालता रहा।

शिकायत में कहा गया था कि 20 दिसंबर 2022 को आरोपित महिला को रांची लेकर आया। अगले दिन 21 दिसंबर को एक होटल में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपित ने उससे संबंध खत्म कर लिया। दो अप्रैल 2023 को उसने अपना मोबाइल फोन भी बंद कर दिया।

महिला ने जब आरोपित के पिता से संपर्क किया तो आरोप है कि आरोपित और उसके परिवार के सदस्यों ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

शुरुआत से शादी की नीयत नहीं होने का आरोप नहीं

सुनवाई के दौरान आरोपित की ओर से कहा गया कि दोनों के बीच सात साल से अधिक समय तक संबंध रहा और महिला बालिग थी। ऐसे में यह सहमति से बना संबंध था। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध किया।

अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई विशिष्ट आरोप नहीं है कि आरोपित ने शुरुआत से ही महिला से शादी करने का इरादा नहीं रखा था। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शादी का वादा तभी झूठा माना जाएगा, जब वादा करते समय ही उसे पूरा करने की नीयत नहीं हो और उसी झूठे वादे के आधार पर महिला को शारीरिक संबंध के लिए तैयार किया गया हो। बाद में शादी का वादा पूरा नहीं करना अपने आप में झूठा वादा नहीं माना जा सकता।

सात साल तक संबंध को कोर्ट ने माना अहम

अदालत ने कहा कि दोनों के बीच सात साल से अधिक समय तक शारीरिक संबंध रहा। प्राथमिकी दर्ज कराने का कारण आरोपित और उसके परिवार की ओर से शादी से इनकार करना था। अदालत ने कहा कि आरोपों को सही मान लेने पर भी यह मामला सहमति से बने शारीरिक संबंध का ही बनता है और दुष्कर्म की धारा के तहत अपराध साबित नहीं होता।