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झारखंड सरकार को हाई कोर्ट का झटका, 1996 कर्मियों की नौकरी पर संकट टला; अब 24 अगस्त को अगली सुनवाई

Published: Fri, 21 Aug 2026 07:19 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी ...और पढ़ें

झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्ति रद करने के आदेश पर रोक।

झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सीजीएल और सीडीपीओ नियुक्ति रद करने के आदेश पर रोक।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सीजीएल, सीडीपीओ नियुक्ति रद्द करने पर रोक लगाई।

  2. 1,996 पदाधिकारियों, कर्मियों की नौकरी पर संकट टला।

  3. सरकार के आदेश को नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन माना गया।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (सीजीएल) तथा झारखंड लोक सेवा आयोग की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) नियुक्ति परीक्षा रद करने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

इससे सीजीएल से विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों में नियुक्त 1,932 कर्मियों तथा 64 नवनियुक्त सीडीपीओ को बड़ी राहत मिली है। दोनों नियुक्ति परीक्षाएं रद होने से इनकी नियुक्ति समाप्त हो गई थी। अब फिलहाल ये सभी नौकरी पर बने रहेंगे।

अदालत ने सुनवाई के क्रम में सरकार के निर्णय को नैसर्गिक न्याय का उल्लंघन माना है। अदालत ने कहा कि वह इस मामले में त्वरित सुनवाई करेगी। कोर्ट ने सरकार को इस मामले में सात सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने राज्य सरकार को अपने शपथपत्र में यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सीआइडी की जांच में ऐसा क्या तथ्य सामने आया, जिसके आधार पर इतने बड़े पैमाने पर विज्ञापनों को रद करने का निर्णय लिया गया।

यह भी पूछा है कि इतनी बड़ी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या ठोस कारण है? कोर्ट ने प्रार्थियों को भी सरकार के जवाब पर अपना पक्ष 14 सितंबर तक शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। गुरुवार को हाई कोर्ट ने जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा रद करने के आदेश पर भी रोक लगाई थी।

सुनवाई के क्रम में सरकार के आग्रह पर अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी प्रतिदिन सुनवाई की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार और प्रार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने कहा कि मामले में जल्द सुनवाई पूरी करते हुए शीघ्र निर्णय सुनाया जाएगा। याचिका सुभाष मुर्मू व अन्य, आशीष अक्षत एवं अन्य रवि कुमार हांसदा एवं अन्य और आकांक्षा मिंज और अन्य ने दाखिल की है।

बिना पक्ष सुने सरकार ने रद की नियुक्ति

प्रार्थियों की ओर अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत को बताया कि इस मामले में सीजीएल अभ्यर्थियों को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उनकी नियमित नियुक्ति हुई है। ऐसे में उनके नियुक्ति को रद करने का आदेश नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।

उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया गया, जिसमें उनकी नियुक्ति अंतिम परिणाम से प्रभावित होने की बात कही गई थी। उनका कहना था कि इस मामले की जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया है, जिसके आधार पर सरकार ने मान लिया है कि सभी अभ्यर्थी गड़बड़ी में शामिल थे।

यह तो ट्रायल के अंतिम आदेश से प्रभावित होगा। ऐसे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की बात कहते हुए नियुक्ति रद करने का आदेश तुगलकी फरमान जैसा है।

पक्ष रखने का मिले पर्याप्त समय

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाएं हाल ही में दाखिल हुई हैं और तत्काल सुनवाई की जा रही है। सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। इसलिए इस मामले में जल्द सुनवाई पूरी कर ली जाए।

इस पर अदालत ने कहा कि न्यायालय को पूरे मामले की स्थिति देखनी है और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना है। अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपना पक्ष शपथ पत्र के माध्यम से रख सकती है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय ने पक्ष रखा।

नियुक्ति नहीं होने वाली रद परीक्षाओं पर 24 को सुनवाई

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा रद की गई जेपीएससी की उन नियुक्ति परीक्षाओं से संबंधित सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जिनके आधार पर अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है।

इन मामलों पर सुनवाई के लिए 24 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान सहायक वन संरक्षक की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन रद किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर भी तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया।

इस पर अदालत ने कहा कि इस विज्ञापन के आधार पर अभी नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए इसे भी उन मामलों के साथ सूचीबद्ध किया जाए, जिनमें नियुक्ति नहीं हुई है।

क्या है पूरा मामला?

राज्य में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 17 अगस्त को विशेष कैबिनेट की बैठक की थी। बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर सीजीएल सहित कुल 22 प्रतियोगिता परीक्षाओं को रद करने की अधिसूचनाएं 18 अगस्त को जारी की गईं।

सीआईडी जांच में इनमें गड़बड़ी सामने आई थी या फिर जिनमें टीडीपीएल एजेंसी की भूमिका सामने आने आई थी। इसके अलावा वर्ष 2014 से आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को देखते हुए सीआइडी से जांच कराने को लेकर भी अधिसूचना जारी हुई थी।

कुल 22 परीक्षाओं को रद करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। रद 22 परीक्षाओं में चार में नियुक्ति हो चुकी थी।

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